उपेंद्र कुशवाहा के बेटे ने संभाला मोर्चा, गाड़ी से उतरकर खुद की एक-एक चीज़ की जांच

जब बिहार सरकार में इंजीनियर दीपक प्रकाश ने पंचायती राज मंत्री के रूप में शपथ ली थी, तब सिर्फ एक चर्चा नहीं थी, बल्कि सवालों की बाढ़ थी। उम्र को लेकर सवाल, अनुभव को लेकर सवाल, और सबसे बड़ा सवाल—ना विधायक हैं, ना एमएलसी, फिर सीधे मंत्री कैसे बन गए?

उपेंद्र कुशवाहा के बेटे ने संभाला मोर्चा, गाड़ी से उतरकर खुद की एक-एक चीज़ की जांच
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
: Dec 20, 2025, 7:11:00 PM

जब बिहार सरकार में इंजीनियर दीपक प्रकाश ने पंचायती राज मंत्री के रूप में शपथ ली थी, तब सिर्फ एक चर्चा नहीं थी, बल्कि सवालों की बाढ़ थी। उम्र को लेकर सवाल, अनुभव को लेकर सवाल, और सबसे बड़ा सवाल—ना विधायक हैं, ना एमएलसी, फिर सीधे मंत्री कैसे बन गए?

राजनीतिक गलियारों में कहा गया कि पिता की पार्टी है, इसलिए सीधे सत्ता की कुर्सी मिल गई। सोशल मीडिया पर लिखा गया कि बिना विधानसभा, बिना विधान परिषद, बिना प्रशासनिक अनुभव के इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी गई। शपथ के दिन से ही यह बहस तेज थी कि क्या इतनी कम उम्र में, बिना किसी राजनीतिक ट्रैक रिकॉर्ड के कोई मंत्री बन सकता है?

लेकिन आज वही इंजीनियर दीपक प्रकाश इन सवालों का जवाब भाषणों से नहीं, जमीन पर उतरकर दे रहे हैं। बिना किसी पूर्व सूचना के, बिना किसी तामझाम के, पंचायती राज मंत्री सीधे निर्माणाधीन पंचायत सरकार भवन के निरीक्षण के लिए मौके पर पहुंच जाते हैं। न स्वागत, न मंच, न माइक—सिर्फ एक्शन।

कम उम्र का यह मंत्री फाइलों के बीच नहीं, ईंट, बालू और सीमेंट के बीच खड़ा दिखाई देता है। खुद दीवारें देखते हैं, खुद निर्माण की गुणवत्ता परखते हैं, और अधिकारियों से सीधे सवाल करते हैं—काम कहां तक पहुंचा, देरी क्यों हुई, और जिम्मेदार कौन है?

मंत्री दीपक प्रकाश साफ शब्दों में कहते हैं कि पंचायत सरकार भवन सिर्फ एक इमारत नहीं है। यही गांव की सरकार का आधार है। यहीं से जनता के काम होंगे, यहीं से योजनाएं लागू होंगी। अगर निर्माण में लापरवाही हुई, तो इसका नुकसान सीधे ग्रामीण जनता को होगा, और इसकी इजाजत किसी भी हाल में नहीं दी जाएगी।

यहां कोई कागजी रिपोर्ट नहीं चलती। कोई बहाना नहीं चलता। मंत्री का साफ संदेश है—काम दिखना चाहिए। समय पर दिखना चाहिए। गुणवत्ता में दिखना चाहिए। यही वजह है कि अधिकारी और संवेदक दोनों अलर्ट मोड में नजर आते हैं।

शपथ के वक्त जिन लोगों ने कहा था कि यह मंत्री अनुभवहीन हैं, आज वही देख रहे हैं कि यह मंत्री निरीक्षण करना जानते हैं, सवाल पूछना जानते हैं और जवाबदेही तय करना भी जानते हैं। नेतृत्व उम्र से नहीं, नीयत और मेहनत से तय होता है—और यही तस्वीर दीपक प्रकाश पेश कर रहे हैं।

पंचायती राज विभाग सीधे गांव, गरीब और आम आदमी से जुड़ा विभाग है। पंचायत सरकार भवन वह जगह है जहां ग्रामीण अपनी सबसे बुनियादी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में इन भवनों का मजबूत, समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से बनना बेहद जरूरी है। और यही वजह है कि मंत्री खुद मैदान में उतरकर निगरानी कर रहे हैं।

यह औचक निरीक्षण सिर्फ एक पंचायत तक सीमित नहीं है। यह पूरे बिहार के लिए संदेश है कि अब पद नहीं, प्रदर्शन देखा जाएगा। मंत्री बनना आसान हो सकता है, लेकिन मंत्री के रूप में काम करना जरूरी है—और दीपक प्रकाश उसी रास्ते पर चलते दिख रहे हैं।

कम उम्र, अनुभव को लेकर सवाल, राजनीतिक पहचान को लेकर बहस—सब कुछ पीछे छूटता जा रहा है। अब सामने है एक्शन, निरीक्षण और सख्ती। यही है पंचायती राज मंत्री इंजीनियर दीपक प्रकाश—जो आरोपों का जवाब शब्दों से नहीं, काम से दे रहे हैं।