उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में टूट की संभावना, पार्टी में नहीं पहुंचे तीन विधायक, नितिन नबीन से मिले 3 MLA

बिहार में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में ऐसा लग रहा है कि सब कुछ ठीक नहीं है. कुछ तस्वीरें सामने आई हैं जिससे टूट के संकेत दिख रहे हैं. इसको लेकर सियासी गलियारे में अटकलों का दौर शुरू हो गया है

उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में टूट की संभावना, पार्टी में नहीं पहुंचे तीन विधायक, नितिन नबीन से मिले 3 MLA
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
: Dec 25, 2025, 3:26:00 PM

बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को लेकर ऐसे संकेत सामने आ रहे हैं, जो अंदरूनी टूट और असंतोष की ओर इशारा कर रहे हैं। हालिया घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है कि क्या वाकई पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा।

दरअसल, बुधवार 24 दिसंबर 2025 की रात पटना में उपेंद्र कुशवाहा की ओर से लिट्टी-चोखा भोज का आयोजन किया गया था। यह भोज पार्टी के विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को एकजुट करने और संगठन में मजबूती का संदेश देने के उद्देश्य से रखा गया था। लेकिन इस कार्यक्रम में पार्टी के तीन विधायकों की गैरमौजूदगी ने सियासी हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

विधायक माधव आनंद, आलोक सिंह और रामेश्वर महतो इस भोज में शामिल नहीं हुए। इनकी अनुपस्थिति इसलिए भी ज्यादा चर्चा में है क्योंकि इसी दिन ये तीनों विधायक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य नितिन नबीन से मुलाकात करते हुए नजर आए। इस मुलाकात की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिन्हें विधायक रामेश्वर महतो ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया।

तस्वीर के साथ रामेश्वर महतो ने इसे एक औपचारिक और शिष्टाचार भेंट बताया और नितिन नबीन को उनके नए दायित्व के लिए बधाई दी। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल और समय को देखते हुए इस मुलाकात को सिर्फ शिष्टाचार तक सीमित मानना आसान नहीं है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, पार्टी के अहम कार्यक्रम में तीन विधायकों का न पहुंचना और उसी दिन बीजेपी नेता से मुलाकात करना, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के भीतर बढ़ती असहजता और संभावित राजनीतिक फेरबदल की ओर इशारा करता है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह मुलाकात महज संयोग थी या बिहार की राजनीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत।

बताया जा रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के विधायक माधव आनंद मंत्री की रेस में थे, लेकिन कुशवाहा ने अपने बेटे को मंत्री बना दिया।

रालोमा के टिकट पर मधुबनी से जीत कर आए माधव आनंद मंत्री की रेस में आगे थे, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाया। जिसके बाद से उनकी नाराजगी की खबरें सामने आईं। हालांकि, डैमेज कंट्रोल के लिए कुशवाहा ने माधव आनंद को पार्टी के विधायक दल का नेता बनाया।

कुछ दिन पहले ही मंत्री नहीं बनाए जाने को लेकर उन्होंने नाराजगी भी जताई थी। 3 दिसंबर को मीडिया से बात करते हुए कहा था, "मेरी व्यक्तिगत इच्छा है कि मैं मंत्री बनूं। मंत्री बनने की हर काबिलियत मुझमें है. क्वालिफाइड हूं। अर्थशास्त्री हूं। 55 देशों की यात्रा कर चुका हूं। आगे भी मंत्री बनने की इच्छा रहेगी। उम्मीद है कि आगे मुझे कैबिनेट में मौका मिलेगा।"