बिहार की राजनीति में इन दिनों राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। वजह है—उनके परिवार को लेकर उठ रहे परिवारवाद के आरोप और उस पर उनका ताजा सोशल मीडिया पोस्ट।
दरअसल, हाल ही में मीडिया में ऐसी खबरें सामने आईं जिनमें दावा किया गया कि उपेंद्र कुशवाहा अपने बेटे के बाद अब अपनी बहू को भी सत्ता में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। इन खबरों पर तंज कसते हुए उपेंद्र
कुशवाहा ने सोशल मीडिया पर लिखा—
“आज एक खबर देखने और पढ़ने को मिली। खबरें प्लांट करवाने और करने वाले को धन्यवाद। मजा आ गया। वाह भाई वाह! ऐसी फालतू खबरें भी मीडिया में चलती और बिकती हैं, यह आश्चर्य की बात है।”
हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा इससे कहीं आगे बढ़ चुकी है। बताया जा रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी बहू साक्षी मिश्रा कुशवाहा को बिहार राज्य नागरिक परिषद का उपाध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव भाजपा को भेजा है। यह पद हाल ही में खाली हुआ है, क्योंकि इसके पूर्व उपाध्यक्ष माधव आनंद विधायक बन गए हैं।
गौर करने वाली बात यह है कि उपेंद्र कुशवाहा स्वयं राज्यसभा सांसद हैं, उनकी पत्नी स्नेहलता विधायक हैं और उनके बेटे दीपक प्रकाश को बिना चुनाव लड़े नीतीश कैबिनेट में मंत्री बनाया गया है। अब अगर बहू को भी कोई संवैधानिक या राजनीतिक पद मिलता है, तो यह पूरा परिवार सत्ता के केंद्र में आ जाएगा।
यही वजह है कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा के भीतर भी असंतोष गहराता जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी के चार में से तीन विधायकों ने बगावती रुख अपना लिया है। उनका आरोप है कि पार्टी नेतृत्व केवल अपने परिवार को आगे बढ़ाने में लगा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बहू को पद देने का यह ‘एडजस्टमेंट’ होता है, तो आरएलएम में बड़ी टूट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह चर्चा महज अफवाह साबित होती है या बिहार की राजनीति में एक नया सियासी भूचाल लाती है।