TMC के बागी सांसदों ने किया NCP में विलय का दावा, स्पीकर ओम बिरला को सौंपा ज्ञापन

TMC के बागी सांसदों ने किया NCP में विलय का दावा, स्पीकर ओम बिरला को सौंपा ज्ञापन

TMC के बागी सांसदों ने किया NCP में विलय का दावा, स्पीकर ओम बिरला को सौंपा ज्ञापन
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jun 15, 2026, 12:16:00 PM

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर लंबे समय से चल रहा असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी के एक बड़े बागी समूह ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर संसद में अलग समूह के रूप में बैठने की अनुमति मांगी और साथ ही एक नए राजनीतिक मंच से जुड़ने का दावा किया।

बागी खेमे की ओर से सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि टीएमसी के लोकसभा सदस्यों में से आवश्यक संख्या उनके साथ है और इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को औपचारिक पत्र सौंपा गया है। उनके अनुसार, यह समूह त्रिपुरा आधारित नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी (एनसीपी) में शामिल होने की प्रक्रिया में है और आगे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन देगा।

इस बीच, टीएमसी के वरिष्ठ नेता और सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने भी कहा कि असंतुष्ट सांसदों ने खुद को एक अलग राजनीतिक इकाई के रूप में स्थापित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि जिस पार्टी में विलय का दावा किया जा रहा है, वह एक पंजीकृत क्षेत्रीय संगठन है, हालांकि उसे अभी चुनाव आयोग की मान्यता प्राप्त नहीं है।

बंदोपाध्याय ने यह भी संकेत दिया कि बागी गुट पार्टी के चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ पर भी अपना अधिकार जताने की तैयारी में है। उन्होंने कहा कि भविष्य में यह विवाद न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से तय होगा कि तृणमूल कांग्रेस की वास्तविक पहचान किस पक्ष के पास है।

दूसरी ओर, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले आधिकारिक टीएमसी खेमे ने इस घटनाक्रम का विरोध किया है। रविवार को टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर पार्टी की ओर से एक पत्र सौंपा।

अभिषेक बनर्जी द्वारा लिखे गए इस पत्र में अनुरोध किया गया है कि किसी भी कथित अलग गुट को संसदीय मान्यता न दी जाए। पत्र में यह दलील दी गई है कि भारतीय संविधान और दलबदल विरोधी कानून किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के भीतर समानांतर संसदीय समूह के गठन की अनुमति नहीं देते।

सूत्रों के अनुसार, यह पत्र पहले 10 जून को ईमेल के माध्यम से भी लोकसभा अध्यक्ष को भेजा गया था। पार्टी का कहना है कि यदि सांसद किसी अन्य राजनीतिक व्यवस्था में शामिल होना चाहते हैं, तो उन्हें दलबदल संबंधी संवैधानिक प्रावधानों का पालन करना होगा।

टीएमसी में उभरा यह विवाद अब केवल संसदीय पहचान तक सीमित नहीं रह गया है। अलग गुट की मान्यता, पार्टी संगठन पर नियंत्रण और चुनाव चिह्न के अधिकार जैसे मुद्दों पर आने वाले दिनों में कानूनी और राजनीतिक संघर्ष तेज होने की संभावना है।