बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल की करारी हार के बाद अब पार्टी के भीतर ही सियासी भूचाल तेज होता जा रहा है। हार की वजहों को लेकर खुलकर सवाल उठने लगे हैं और सीधे तौर पर टिकट वितरण की रणनीति कटघरे में है। इस बार सबसे तीखा हमला खुद राजद के वरिष्ठ नेता और मनेर विधायक भाई वीरेंद्र की ओर से आया है।
भाई वीरेंद्र ने साफ कहा है कि “दूसरे के कहने पर टिकट का बंटवारा करने का नतीजा आज पार्टी भुगत रही है।” उन्होंने मनेर से विजय मंडल का टिकट काटे जाने पर गहरी नाराजगी जताई और सवाल उठाया कि जब अंत में यादव उम्मीदवार को ही टिकट देना था, तो फिर विजय मंडल में आखिर कमी क्या थी। भाई वीरेंद्र ने कहा कि वे और विजय मंडल एक साथ विधायक रहे हैं, पार्टी के लिए लड़ाइयां लड़ी हैं, फिर भी बिना वजह उनका टिकट काट दिया गया।
भाई वीरेंद्र का इशारा राजद के अंदर मौजूद उन नेताओं की ओर था, जिन्हें उन्होंने ‘नाम के समाजवादी’ बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कुछ नेता ऐसे हैं जो दावा करते हैं कि वे तीन-तीन जिलों की राजनीति चलाते हैं। “कोई कैमूर जोत रहा है, कोई रोहतास, और अब बक्सर भी जोतने लगा है। ऐसे लोगों की सलाह पर अगर टिकट बंटेगा तो किसी भी पार्टी का यही हाल होगा,”—भाई वीरेंद्र ने दो टूक कहा।
गौरतलब है कि 2020 के विधानसभा चुनाव में 75 सीटें जीतने वाली राजद 2025 में सिमटकर सिर्फ 25 सीटों पर रह गई। तेजस्वी यादव मुश्किल से नेता प्रतिपक्ष बन पाए। हार की जिम्मेदारी को लेकर लालू परिवार के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आए। रोहिणी आचार्य का भावुक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और पार्टी की अंदरूनी पीड़ा दुनिया ने देखी।
अब भाई वीरेंद्र के बयान ने यह साफ कर दिया है कि राजद की हार सिर्फ चुनावी नहीं, बल्कि संगठनात्मक और रणनीतिक भी है। सवाल यह है कि क्या पार्टी नेतृत्व इन चेतावनियों से सबक लेगा, या अंदरूनी कलह राजद की मुश्किलें और बढ़ाएगी।