एसआईआर की प्रक्रिया मतदाता सूची का शुद्धिकरण, अबतक 8 बार एसआईआर, 7 कांग्रेस ने कराए: मिथिलेश
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) लोकतंत्र को मजबूत करने और मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने की आवश्यक प्रक्रिया है।

पटना: शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) लोकतंत्र को मजबूत करने और मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने की आवश्यक प्रक्रिया है। मतदाता सूची में मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित, अनुपस्थित और दोहरे पंजीकरण वाले मतदाताओं की पहचान करना तथा छूटे हुए पात्र नागरिकों के नाम जोड़ना देशहित और निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी है।
एसआईआर से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए शिक्षा मंत्री ने बताया कि देश के लगभग 95 करोड़ मतदाताओं में से 82 करोड़ यानी करीब 88 फीसदी मतदाताओं ने गणना प्रपत्र भरकर अपनी जानकारी दर्ज कराई। इस प्रक्रिया के दौरान लगभग 2.89 करोड़ मृत वोटरों और 1.01 करोड़ दोहरे पंजीकरण वाले मतदाताओं की पहचान की गई। वहीं, दो करोड़ से अधिक लोगों ने फॉर्म-6 के माध्यम से मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन किया।
तिवारी ने कहा कि अबतक आठ बार; 1952-56,1957, 1961,1965-66, 1983-84, 1987-89, 1992-95 और 2002-04 में एसआईआर हो चुका है। इनमें सात बार केंद्र में कांग्रेस की सरकार रही है। इसके अलावा तमिलनाडु और केरलम में कांग्रेस गठबंधन के दल अपनी जीत में एसआईआर की अहम भूमिका को स्वीकार कर चुके हैं। केरलम के गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला ने माना था कि पहले सीपीएम फर्जी वोट डलवाती थी। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी एसआईआर का समर्थन किया है। कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट देश में अवैध रूप से रह रहे लोगों को हटाने का बयान दे चुके हैं।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दल वोट चोरी का झूठा नैरेटिव फैला कर चुनाव आयोग पर हमला कर रहे हैं ताकि प्रधानमंत्री मोदी के विकास कार्यों से लोगों का ध्यान भटकाया जा सके। चूंकि अगले वर्ष यूपी में भी चुनाव हैं, इसलिए परिवारवाद की प्रतीक कांग्रेस इस तरह का दुष्प्रचार कर रही है। उसे करारी हार का भय सता रहा है। उधर, अखिलेश की स्थिति तेजस्वी से भी बदतर होने वाली है। योगी जी की 10 वर्षों की सरकार इस बार फिर पूर्ण बहुमत से लौटेगी। कांग्रेस और सपा वाले कॉकरोच जनता पार्टी का मुखौटा ओढ़ कर देश की जनता को दिग्भ्रमित करने का नाकाम प्रयास कर रहे हैं।
तिवारी ने कहा कि एसआईआर का उद्देश्य किसी पात्र मतदाता का अधिकार छीनना नहीं है। इसका मकसद अपात्र नामों को हटाकर वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम सूची में सुनिश्चित करना है। यह प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के तहत चुनाव आयोग द्वारा संचालित की जाती है। इसलिए इसे राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय लोकतंत्र की मजबूती, चुनाव की निष्पक्षता और जनादेश की विश्वसनीयता की दृष्टि से देखा जाना चाहिए।













