13 अप्रैल से शुरू होगी सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया, NDA ने तय किया बिहार का नया चेहरा

13 अप्रैल से शुरू होगी सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया, NDA ने तय किया बिहार का नया चेहरा

13 अप्रैल से शुरू होगी सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया, NDA ने तय किया बिहार का नया चेहरा
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Apr 09, 2026, 4:14:00 PM

बिहार की राजनीति में लंबे समय से कायम सत्ता संतुलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने संकेत दे दिए हैं कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर गठबंधन के भीतर पूरी स्पष्टता है और जल्द ही सत्ता की बागडोर नए चेहरे को सौंपी जाएगी। इस बदलाव की प्रक्रिया 13 अप्रैल से शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इसके बाद राज्य की राजनीतिक गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ेंगी। भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन ने कहा है कि तीन दशकों तक गठबंधन सहयोगी की भूमिका निभाने के बाद अब पार्टी नेतृत्व की नई जिम्मेदारी संभालने को तैयार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगे की रणनीति पहले से तय खाके के अनुसार ही लागू की जाएगी।

नीतीश कुमार के दिल्ली दौरे को भी इस पूरे घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा में शपथ ग्रहण के बाद वे पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। पटना लौटने के बाद 13 अप्रैल को कैबिनेट की अंतिम बैठक बुलाई जा सकती है, जिसमें अहम फैसले लिए जाने की संभावना है। इसके बाद 14 या 15 अप्रैल तक उनके इस्तीफे की औपचारिकता पूरी हो सकती है।

अगर यह बदलाव तय समयसीमा के अनुसार होता है, तो बिहार के इतिहास में यह पहली बार होगा जब भाजपा का कोई नेता मुख्यमंत्री पद संभालेगा। जदयू की ओर से भी संकेत मिले हैं कि नई सरकार के गठन की प्रक्रिया 13 अप्रैल के बाद शुरू हो जाएगी। माना जा रहा है कि 18 या 19 अप्रैल को नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है।

भाजपा इस अवसर को बड़े राजनीतिक आयोजन के रूप में पेश करने की तैयारी में है। संभावित कार्यक्रम पटना के किसी बड़े मैदान में आयोजित हो सकता है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हो सकते हैं। नई सरकार के साथ एक ताजा मंत्रिमंडल भी गठित होगा, जो आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए काम करेगा।

इसी बीच, नितिन नवीन ने विपक्षी दलों पर भी तीखे आरोप लगाए। उन्होंने पश्चिम बंगाल की स्थिति को लेकर ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वहां की हिंसा के लिए राज्य नेतृत्व जिम्मेदार है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस की नीतियों को भी देशहित के खिलाफ बताते हुए उसे भाजपा के लिए कमजोर राजनीतिक चुनौती करार दिया।