'वित्तीय संकट ही नहीं प्रशासनिक विवेक पर भी गंभीर सवाल' तेजस्वी यादव ने फिर फोड़ा 'बम' 'नौसिखिए मुख्यमंत्री गुमराह करना बंद कीजिए'

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने NDA सरकार पर बड़ा हमला बोला है। तेजस्वी ने नौसिखिया नेतृत्व' पर निशाना साधा और सवालों का जवाब मांगा है उन्होंने कहा है कि जनता को गुमराह करना सरकार बंद करे।

'वित्तीय संकट ही नहीं प्रशासनिक विवेक पर भी गंभीर सवाल' तेजस्वी यादव ने फिर फोड़ा 'बम' 'नौसिखिए मुख्यमंत्री गुमराह करना बंद कीजिए'
swaraj post

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Amit Kumar
: Jun 12, 2026, 2:43:00 PM

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने NDA सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने सम्राट सरकार की वित्तीय स्थिति पर बड़ा आरोप लगाया है। तेजस्वी यादव ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार कंगाल होने के कगार पर और खजाना खाली है। तेजस्वी ने नौसिखिया नेतृत्व' पर निशाना साधा और सवालों का जवाब मांगा है उन्होंने कहा है कि जनता को गुमराह करना सरकार बंद करे।  

तेजस्वी यादव ने एक्स पर लिखा है-हम सभी के लिए अत्यंत चिंता का विषय है कि एनडीए की दिवालिया राजनीति और दिवालिए नेतृत्व के कारण प्रदेश की बिगड़ चुकी वित्तीय स्थिति, घटता राजस्व, बढ़ता राजकोषीय घाटा, अत्यधिक कर्ज, भारी ब्याज अदायगी तथा खोखली व अदूरदर्शी नीतियों के कारण हमारा बिहार कंगाल होने के कगार पर है। खज़ाना खाली होने के कारण प्रदेश में अराजकत वित्तीय हालात है।

 नौसिखिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार का बजटीय प्रबंधन इतना बुरा, वित्तीय स्थिति इतनी बदतर और परिस्थितियां इतनी भयावह है कि वित्तीय वर्ष 𝟐𝟎𝟐𝟔-𝟐𝟕 के मात्र तीन महीने ही बीते है और सामान्य मासिक पेंशन दिए जाने वाले जैसे रूटीन भुगतान और कार्यों के लिए भी आकस्मिक निधि (𝐂𝐨𝐧𝐭𝐢𝐧𝐠𝐞𝐧𝐜𝐲 𝐅𝐮𝐧𝐝) से 𝟑𝟔𝟔𝟐 करोड़ रुपए की निकासी करनी पड़ रही है।

तेजस्वी ने आगे लिखा है-सरकार को वित्तीय संकट की सच्चाई स्वीकार कर, आम जनता को गुमराह करने के बदले राज्यवासियों को स्पष्टता से बताना चाहिए कि आखिर ऐसी नौबत क्यों आई कि रूटीन भुगतान के लिए नियमित बजटीय व्यवस्था की बजाय आकस्मिकता निधि का सहारा लेना पड़ रहा है ?मेरे तथ्यात्मक, वास्तविक, तर्कपूर्ण सवालों का जवाब देने की बजाय एनडीए सरकार भ्रामक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बचकाने कार्य कर रही है। 

सरकार में बैठे लोगों को आकस्मिकता निधि के संबंध में सर्वप्रथम संविधान के अनुच्छेद 𝟐𝟔𝟕(𝟏) एवं (𝟐) में अंकित प्रावधानों का अवलोकन करना उचित होगा। संविधान के अनुसार, “According to article 267(1) Parliament may by law establish a contingency fund, which shall be placed at the disposal of the President, for the purposes of meeting unforeseen expenditure.

Similarly, in article 267(2) it is provisioned that the legislature of a state may by law established a contingency fund which shall be placed at the disposal of the governor to enable advances for the purpose of meeting unforeseen expenditure.

तेजस्वी यादव आगे लिखते हैं-संवैधानिक प्रावधानों के अवलोकन से यह स्पष्ट होता है कि “𝐓𝐡𝐞 𝐞𝐱𝐩𝐞𝐧𝐝𝐢𝐭𝐮𝐫𝐞 𝐦𝐮𝐬𝐭 𝐛𝐞 𝐨𝐟 𝐚𝐧 𝐮𝐧𝐟𝐨𝐫𝐞𝐬𝐞𝐞𝐧 𝐧𝐚𝐭𝐮𝐫𝐞 𝐨𝐫 𝐨𝐟 𝐞𝐦𝐞𝐫𝐠𝐞𝐧𝐭 𝐜𝐡𝐚𝐫𝐚𝐜𝐭𝐞𝐫” अर्थात् नार्मल और रूटीन मामलों में इस फंड का इस्तेमाल नहीं किया जाना है। राज्य में अचानक आए किसी संकट से निपटने के लिए राज्यपाल इस निधि से अग्रिम राशि की मंजूरी दे सकते हैं

ऐसी स्थिति में सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन जो दशकों से नियमित तरीके से हर महीने लाभुक के खाते में जाती रही है, अब बिना व्यवस्था परिवर्तन ऐसी क्या विचित्र वित्तीय परिस्थिति उत्पन्न हो गई कि सामान्य मासिक पेंशन दिए जाने के लिए भी आकस्मिक निधि का इस्तेमाल किया गया। अगर सरकार को सामान्य और नियमित खर्च के लिए भी आकस्मिक निधि का उपयोग करना पड़ रहा है तो फिर विकास कार्यों और अन्य परियोजनाओं के लिए धनराशि कहाँ से आएगी? 

सरकार पर दिग्भ्रमित करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा है-क्या पेंशन कोई आकस्मिक खर्च है? पेंशनधारक और हमारे सम्मानित बुजुर्ग और माता-बहनें आपदा नहीं हो सकते जिनके लिए आपको आपदा राशि से भुगतान करना पड़े? सरकार इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की जगह मामले को दिग्भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। बिहार सरकार द्वारा इसे बजटीय प्रबंधन मात्र बताकर इसके सैद्धांतिक पक्ष और मूल कारण बताने से बचने का प्रयास किया गया है। सरकार की आर्थिक स्थिति दयनीय है इसलिए पब्लिक डोमेन में सरकार इसे स्वीकार करने से डर रही है।

वित्तीय हालात चिंताजनक बताते हुए तेजस्वी यादव ने लिखा है-बिहार के वित्तीय हालात को लेकर जो संकेत मिल रहे हैं वो चिंताजनक है। वित्तीय वर्ष 𝟐𝟔-𝟐𝟕 बजट में बताया गया है कि वर्ष 𝟐𝟓-𝟐𝟔 में बिहार का राजकोषीय घाटा (𝐅𝐢𝐬𝐜𝐚𝐥 𝐃𝐞𝐟𝐢𝐜𝐢𝐭) 𝟏𝟏.𝟖% के चिंताजनक स्तर पर पहुँच चुका है। इस संबंध में यह स्पष्ट करना जरूरी है की 𝐅𝐑𝐁𝐌 𝐀𝐜𝐭 (राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम) के तहत राजकोषीय घाटा 𝟑% से अधिक नहीं होना चाहिए परंतु बिहार सरकार का राजकोषीय घाटा लक्ष्य के तीन से पाँच गुना तक अधिक हो रहा है।

वहीं तेजस्वी यादव ने प्रशासनिक विवेक पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करते हुए लिखा है- बिहार में वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल पहले से ही उठ रहे हैं, लेकिन अब एक ऐसा प्रावधान सामने आया है जो केवल वित्तीय अनुशासन ही नहीं बल्कि प्रशासनिक विवेक पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। कुछ माह पूर्व 𝐍𝐃𝐀 सरकार एक संशोधन लेकर आयी है , जिसके तहत प्रावधान किया गया कि बिहार आकस्मिकता निधि का आकार किसी भी वित्त वर्ष में उस वर्ष के बजटीय व्यय के 𝟏𝟎% तक बढ़ाया जा सकता है।