आरसीपी सिंह को श्याम रजक ने दिया खुला ऑफर, बोले- अगर वे जेडीयू में आना चाहते हैं, तो स्वागत है

बिहार में मकर संक्रांति के मौके पर दही-चूड़ा भोज के साथ सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। राजधानी पटना समेत राज्य के कई हिस्सों में राजनीतिक नेताओं के आवास पर पारंपरिक दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया, लेकिन इन आयोजनों में राजनीति भी पूरी तरह हावी नजर आई।

आरसीपी सिंह को श्याम रजक ने दिया खुला ऑफर, बोले- अगर वे जेडीयू में आना चाहते हैं, तो स्वागत है
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
: Jan 14, 2026, 3:20:00 PM

बिहार में मकर संक्रांति के मौके पर दही-चूड़ा भोज के साथ सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। राजधानी पटना समेत राज्य के कई हिस्सों में राजनीतिक नेताओं के आवास पर पारंपरिक दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया, लेकिन इन आयोजनों में राजनीति भी पूरी तरह हावी नजर आई। इसी कड़ी में बिहार सरकार के पूर्व मंत्री रत्नेश सदा के आवास पर आयोजित दही-चूड़ा भोज खासा चर्चा में रहा, जहां विधायक श्याम रजक भी पहुंचे और मीडिया से बातचीत में बड़ा बयान दे दिया।

दरअसल, जनसुराज के नेता आरसीपी सिंह के जेडीयू में वापसी की अटकलों को लेकर जब श्याम रजक से सवाल पूछा गया तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “वो अलग थे ही कब? अगर वे जेडीयू में आना चाहते हैं तो उनका स्वागत है। वे आएं।” श्याम रजक के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नए कयास लगाए जाने लगे हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे आरसीपी सिंह की संभावित घर वापसी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

इससे पहले खुद आरसीपी सिंह भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ अपने रिश्ते को लेकर बड़ा बयान दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि “हम दोनों तो एक ही हैं। हम 25 साल तक साथ रहे हैं। जितना हम एक-दूसरे को जानते हैं, उतना कोई नहीं जानता।” जेडीयू में वापसी के सवाल पर आरसीपी सिंह ने कहा था कि “ये तो आपको पता चल जाएगा।” उनके इस बयान ने भी राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी थी।

वहीं, दही-चूड़ा भोज की राजनीति पर बोलते हुए श्याम रजक ने तेज प्रताप यादव के भोज में शामिल होने के सवाल पर कहा कि “हम सभी जगह जाएंगे। यह शिष्टाचार और परंपरा का हिस्सा है, इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।” जानकारी के मुताबिक, रत्नेश सदा के दही-चूड़ा भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हुए। इस दौरान जेडीयू के वरिष्ठ नेता संजय झा भी मौजूद रहे।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दही-चूड़ा भोज के बहाने आगे और कौन से सियासी संदेश सामने आते हैं और बिहार की राजनीति किस दिशा में जाती