शिवानंद तिवारी बोले –तेजस्वी ओझल, तेज प्रताप छाया… राबड़ी आवास पर सन्नाटा, पस्त कार्यकर्ताओं को कौन देगा दिलासा?

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के मित्र शिवानंद तिवारी ने मकर संक्रांति के अवसर पर पटना में दही-चूड़ा भोज की राजनीति के जरिए एक बार फिर से तेजस्वी यादव की निष्क्रियता और हताशा को निशाने पर लिया है।

शिवानंद तिवारी बोले –तेजस्वी ओझल, तेज प्रताप छाया…  राबड़ी आवास पर सन्नाटा, पस्त कार्यकर्ताओं को कौन देगा दिलासा?
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
: Jan 14, 2026, 7:43:00 PM

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के मित्र शिवानंद तिवारी ने मकर संक्रांति के अवसर पर पटना में दही-चूड़ा भोज की राजनीति के जरिए एक बार फिर से तेजस्वी यादव की निष्क्रियता और हताशा को निशाने पर लिया है। तिवारी ने दही-चूड़ा का भोज देने के लिए तेज प्रताप यादव की तारीफ की है और कहा है कि जहां तेज प्रताप यादव छाए हुए हैं, वहीं तेजस्वी यादव ओझल हैं, गुम हैं। तिवारी ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि चुनाव नतीजों से पस्त कार्यकर्ताओं को उत्साहित करने के बदले नेता ही पस्त है और मैदान में नजर ही नहीं आ रही है।

बता दें कि आज पटना में कई नेताओं ने दही-चूड़ा भोज आयोजित किया था, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा तेज प्रताप यादव के कार्यक्रम की हो रही है। कार्यक्रम में लालू यादव के अलावा राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, मंत्री अशोक चौधरी समेत कई नेता पहुंचे थे। तेज प्रताप ने एक दिन पहले ही राबड़ी आवास जाकर लालू, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव को भोज का न्योता दिया था। लालू तो आए लेकिन बाकी लोग नजर नहीं आए। तेज प्रताप यादव को उम्मीद है कि तेजस्वी देर से जगते हैं इसलिए रात में भी आ सकते हैं।

दही-चूड़ा भोज की राजनीति बिहार में हमेशा से चर्चित रही है। कई बार इस भोज के दौरान ही आगे की राजनीति के बदलाव के बीज बोए जाते रहे हैं। शिवानंद ने लिखा- 'भोज की राजनीति के रंग में कोई एक व्यक्ति सराबोर दिखाई दे रहा है, तो उसका नाम तेज प्रताप यादव है। तेजस्वी तो बिल्कुल ओझल हैं। 10 नंबर में सन्नाटा है। वही 10 नंबर जहां बिहार के कोने-कोने से कार्यकर्ता पहुंचते थे। दही-चूड़ा तो बहाना होता था। असल तो नेताओं से देखा-देखी होती थी। दरस, परस और दंड प्रणाम होता था। सब यहां से नई ऊर्जा के साथ अपने इलाके में लौटते थे।'

आज इसकी और ज़्यादा ज़रूरत थी. चुनाव नतीजे से पस्त कार्यकर्ताओं को दिलासा की ज़रूरत थी. उनको भविष्य के लिये उत्साहित करने की ज़रूरत थी. लेकिन जब नेता ही पस्त है. मैदान में कहीं नज़र ही नहीं आ रहा है. ऐसे में भविष्य के लिए दल को कौन ऊर्जान्वित करेगा !

आज तेजस्वी गुम हैं. तेज प्रताप छाया हुआ है. जिन लोगों ने तेजस्वी को मुख्यमंत्री की शपथ के लिए तारीख तय करवा दिया था. इस रास्ते में तेज प्रताप को बड़ा अवरोध बता कर उसको निकाल बाहर किया था, पता नहीं वे लोग कहाँ हैं !