बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने कार्यकाल का पहला महीना पूरा कर लिया है। 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से सरकार ने प्रशासनिक सुधार, कानून-व्यवस्था और विकास योजनाओं को लेकर कई अहम फैसले लिए हैं। शुरुआती एक महीने में लिए गए निर्णयों ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में व्यापक चर्चा पैदा की है। सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की “न्याय के साथ विकास” की नीति को आगे बढ़ाते हुए “समृद्ध बिहार” के लक्ष्य के साथ नई योजनाओं की रूपरेखा तैयार की है।
सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में राज्य के 10 जिलों में 11 सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की पहल शामिल है। इन प्रस्तावित टाउनशिप में आधुनिक शहरी सुविधाओं के साथ व्यवस्थित विकास मॉडल अपनाने की बात कही गई है। चौड़ी सड़कों, बाजारों, हरित क्षेत्रों और सार्वजनिक सुविधाओं से लैस इन नए शहरी केंद्रों का उद्देश्य बड़े शहरों पर बढ़ते दबाव को कम करना और लोगों को बेहतर जीवन सुविधाएं उपलब्ध कराना बताया जा रहा है।
महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने ‘पुलिस दीदी योजना’ शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत महिला पुलिसकर्मियों को स्कूटी उपलब्ध कराई जाएगी और स्कूल-कॉलेज परिसरों के आसपास उनकी तैनाती बढ़ाई जाएगी। योजना का उद्देश्य छात्राओं के खिलाफ होने वाली घटनाओं पर रोक लगाना और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा की भावना मजबूत करना है।
जनसुनवाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने ‘सहयोग की त्रिवेणी’ कार्यक्रम लागू किया है। इसके तहत हेल्पलाइन नंबर 1100, डिजिटल पोर्टल और पंचायत स्तर पर नियमित शिविरों की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को आयोजित होने वाले इन शिविरों में राजस्व, पुलिस और प्रखंड स्तर की शिकायतों पर सुनवाई होगी। शिकायतों के समाधान के लिए 30 दिनों की समय सीमा निर्धारित की गई है।
सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रत्येक प्रखंड में एक मॉडल स्कूल स्थापित करने का निर्णय लिया है। चयनित विद्यालयों और जिला स्कूलों को आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित किया जाएगा। इस योजना के लिए लगभग 800 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके साथ ही उन 208 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज खोलने की तैयारी है, जहां अब तक उच्च शिक्षा संस्थान मौजूद नहीं हैं।
निजी स्कूलों द्वारा फीस वृद्धि और अतिरिक्त शुल्क को लेकर बढ़ती शिकायतों के बीच सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। नए निर्देशों के अनुसार स्कूलों को अपनी फीस संरचना सार्वजनिक करनी होगी। अभिभावकों को किताबें और यूनिफॉर्म किसी भी दुकान से खरीदने की स्वतंत्रता दी गई है। इसके अलावा फीस बकाया रहने की स्थिति में छात्रों को परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकेगा।
राज्य सरकार ने लोक निर्माण नियमों में संशोधन करते हुए 50 करोड़ रुपये तक की सरकारी परियोजनाओं में स्थानीय संवेदकों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि इस कदम से राज्य के युवाओं और स्थानीय निर्माण क्षेत्र को अधिक अवसर मिलेंगे।
भूमि और संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए ई-निबंधन प्रणाली लागू की गई है। नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री प्रक्रिया को डिजिटल और कागजरहित बनाने पर जोर दिया गया है। साथ ही 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर बैठे रजिस्ट्री सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी भी की गई है।
सरकार के शुरुआती कार्यकाल में कानून-व्यवस्था को लेकर भी कड़ा रुख देखने को मिला है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पुलिस प्रशासन को गंभीर अपराधों के खिलाफ सख्ती बरतने और “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाने के निर्देश दिए हैं। पिछले एक महीने में कई प्रशासनिक फेरबदल और पुलिस कार्रवाई भी सुर्खियों में रही हैं।