उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधान परिषद के बजट सत्र के दौरान विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उनके पास सभी नेताओं की फाइल और रिकॉर्ड मौजूद हैं।
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो भी गलत काम करेगा, उसे छोड़ा नहीं जाएगा और एक-एक का इलाज किया जाएगा। इसी बयान को आधार बनाते हुए पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने बिना नाम लिए तीखा पलटवार किया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी के कुकर्मों की फाइल है तो क्या वह ब्लैकमेलिंग के लिए है? उन्होंने लिखा कि यदि किसी के खिलाफ सबूत हैं तो स्पीडी ट्रायल चलाकर सजा दिलाई जाए और संपत्ति जब्त की जाए, न कि ब्लैकमेलर की भाषा बोली जाए।
पप्पू यादव ने अपने पोस्ट में तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे लोगों को जिम्मेदार भाषा का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “बोरिंग रोड के लफ्फुआ की मानसिकता" से बाहर निकलना होगा। लोकतंत्र में ताकत जनता की होती है, न कि किसी पद या कुर्सी की।
अपराध बढ़ने पर सांसद ने कहा, अपराध और बलात्कारियों से जस्टिस नहीं हो रहा है। यह 24 घंटे पप्पू यादव के खिलाफ लगे रहते हैं। उनको मरवा दो, उनको जेल भेज दो, हमको मरवा कर सुरक्षा छीनकर क्या करेंगे।
कहा, भाई हमारे मरने से बिहार सुधर जाए, तो हमें मरवा दीजिए। या अगर पप्पू यादव को जेल भेजने से बिहार में अपराध, बलात्कार रुक जाए जो जेल भेज दीजिए।
पप्पू यादव ने सम्राट चौधरी से अपील करते हुए कहा कि वे जाति विशेष के प्रति नफरत और बदले की भावना से ऊपर उठें। उन्होंने राजनीति को अटल बिहारी वाजपेयी और जवाहरलाल नेहरू के दौर जैसा बताते हुए कहा कि मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिए। उनका आरोप था कि पूरे बिहार में सरकार के निशाने पर सिर्फ वही हैं और विपक्ष भी समझौता कर चुका है, लेकिन वे समझौता नहीं करेंगे।