Kanhaiya Bhelari Editor-in-Chief Swaraj Post की कलम से
इस समय बिहार की राजनीति में सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है—अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?
चाहे प्रिंट मीडिया हो, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो या राजनीतिक गलियारे—हर जगह यही चर्चा है। लोग जानना चाहते हैं कि अगर वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पद छोड़ते हैं, तो उनकी जगह कौन लेगा।
हालांकि, अभी तक नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद पर बने हुए हैं, लेकिन परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। राजनीतिक संकेतों को देखें तो यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे जल्द ही पद छोड़ सकते हैं। फिर भी, जब तक आधिकारिक इस्तीफा नहीं आता, तब तक राजनीति में 100% कुछ भी तय नहीं माना जाता—और यह बात खासकर नीतीश कुमार के संदर्भ में और भी सही बैठती है, क्योंकि उन्हें समझना आसान नहीं है।
अब सबसे बड़ा सवाल—उनके बाद कौन?
मैं शुरू से ही यह कहता आया हूं कि सम्राट चौधरी इस दौड़ में सबसे आगे हैं। मेरी जानकारी और राजनीतिक विश्लेषण के आधार पर यही संकेत मिलते हैं कि स्क्रिप्ट लगभग तैयार है—सिर्फ सही समय का इंतजार है। यह बदलाव मार्च के अंत में भी हो सकता है या अप्रैल में भी।
हालांकि, इस बीच कई तरह की राय सामने आ रही हैं। कई बड़े नेता—चाहे सांसद हों, विधायक हों या संगठन से जुड़े लोग—अपनी-अपनी दलीलें दे रहे हैं। कुछ का मानना है कि बीजेपी का फैसला हमेशा चौंकाने वाला होता है, इसलिए किसी “अनजान चेहरे” को भी मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, जैसा पहले अन्य राज्यों में देखा गया है।
कुछ लोगों का यह भी कहना है कि इस फैसले की असली जानकारी सिर्फ प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को ही होती है। और बीजेपी की परंपरा यह भी रही है कि जिसका नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है, वही अक्सर अंतिम चयन नहीं होता।
लेकिन, इन तमाम अटकलों के बीच मेरा स्पष्ट मानना है कि नीतीश कुमार खुद चाहते हैं कि उनके उत्तराधिकारी सम्राट चौधरी हों।
इसके पीछे कई कारण हैं—
सबसे पहला, अब यह लगभग तय है कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से ही होगा। ऐसे में, नीतीश कुमार की पसंद अहम हो जाती है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, वे सम्राट चौधरी को लेकर सहज हैं और उन्हें अपने बाद एक संतुलित विकल्प के रूप में देखते हैं।
दूसरा, बीजेपी के अंदर भी एक बड़ा वर्ग—खासतौर पर सुशील कुमार मोदी के समर्थक—सम्राट चौधरी के पक्ष में हैं। ये लोग संगठन और विधायकों के बीच प्रभाव रखते हैं।
हालांकि, एक और मजबूत नाम सामने आता है—नित्यानंद राय।
कहा जाता है कि अगर केंद्रीय नेतृत्व का पूरा समर्थन मिला, तो वे भी मुख्यमंत्री बन सकते हैं। लेकिन यह भी सच है कि नीतीश कुमार उन्हें कभी खास पसंद नहीं करते रहे। 2020 के चुनाव के बाद की राजनीतिक घटनाएं इसका उदाहरण हैं, जब कई बदलाव हुए और अंततः समीकरण बदल गए।
कुछ सूत्र यह भी बताते हैं कि संघ पृष्ठभूमि वाले नेता को प्राथमिकता दी जा सकती है। इस आधार पर भी सम्राट चौधरी पर सवाल उठते हैं, क्योंकि उनका राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है—राजद, जदयू, हम और फिर बीजेपी।
लेकिन इसके बावजूद, एक अहम बात सामने आती है—नीतीश कुमार का विश्वास।
चुनाव के समय की एक घटना का जिक्र जरूरी है। बताया जाता है कि सीट बंटवारे और राजनीतिक रणनीति के दौरान सम्राट चौधरी ने जिस तरह से कुछ अहम जानकारी और संतुलन बनाए रखा, उससे नीतीश कुमार काफी प्रभावित हुए। इसके बाद से उनके बीच भरोसा और मजबूत हुआ।
इसी भरोसे का असर आज की राजनीति में भी दिख रहा है।
कहा जा रहा है कि कई वरिष्ठ अधिकारी—आईएएस और आईपीएस स्तर के—भी अंदरखाने सम्राट चौधरी को बधाई दे चुके हैं या देने की तैयारी में हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रशासनिक स्तर पर भी माहौल बन चुका है।
इसके अलावा, कानून-व्यवस्था से जुड़े कुछ मामलों में सम्राट चौधरी की भूमिका को लेकर भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है, जिससे उनकी छवि मजबूत हुई है।
अब बात करते हैं एक और बड़े राजनीतिक समीकरण की—
बताया जा रहा है कि नई सरकार में दो डिप्टी सीएम हो सकते हैं।
पहले चर्चा थी कि सिर्फ निशांत कुमार को यह जिम्मेदारी मिल सकती है, लेकिन अब जो जानकारी सामने आ रही है, उसके अनुसार—
एक डिप्टी सीएम होंगे विजय कुमार चौधरी
और दूसरे होंगे निशांत कुमार
अंत में, अगर पूरे घटनाक्रम को देखें, तो तस्वीर काफी हद तक साफ नजर आती है—
नीतीश कुमार के जाने की संभावना मजबूत है
बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय है
और सम्राट चौधरी सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभर रहे हैं
अब सिर्फ इंतजार है आधिकारिक घोषणा का—जो कभी भी हो सकती है।
फिलहाल के लिए इतना ही।