'राजद-माले ने किया विश्वासघात'... कांग्रेस के आरोपों से गरमाई झारखंड की सियासत

'राजद-माले ने किया विश्वासघात'... कांग्रेस के आरोपों से गरमाई झारखंड की सियासत

'राजद-माले ने किया विश्वासघात'... कांग्रेस के आरोपों से गरमाई झारखंड की सियासत
swaraj post

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jun 19, 2026, 6:48:00 PM

राज्यसभा चुनाव के परिणाम के बाद झारखंड की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों दलों ने गठबंधन की भावना को ठेस पहुंचाई और चुनाव के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी की। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने धनबल और सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल कर चुनावी समीकरण प्रभावित करने की कोशिश की, जबकि कुछ सहयोगी दलों ने भी उसका अप्रत्यक्ष साथ दिया।

आलोक दूबे ने कहा कि कांग्रेस या झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू पर लगाए जा रहे आरोप वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास हैं। उनके अनुसार, राजद और माले ने भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी के पक्ष में मतदान किया और इसके पीछे आर्थिक एवं राजनीतिक स्वार्थ काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जनता इस पूरे घटनाक्रम को समझ चुकी है और समय आने पर इसका राजनीतिक जवाब देगी।

उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी लंबे समय से भाजपा और बड़े उद्योगपतियों के संबंधों पर सवाल उठाते रहे हैं और राज्यसभा चुनाव की परिस्थितियां उन आशंकाओं को और मजबूत करती हैं। उनके मुताबिक भाजपा ने सिद्धांतों की बजाय सत्ता की राजनीति को प्राथमिकता दी।

राजद की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दूबे ने कहा कि चुनाव के दौरान पार्टी का आचरण संदेह पैदा करता है। उन्होंने विशेष रूप से राजद के चुनाव पर्यवेक्षक भोला यादव का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उनका व्यवहार गठबंधन के हितों के बजाय भाजपा को लाभ पहुंचाने वाला प्रतीत हुआ।

माले को भी निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी ने विपक्षी एकजुटता को कमजोर करने का काम किया। उनके अनुसार, जनता अब यह देख रही है कि कौन-से दल भाजपा का विरोध करने का दावा करते हैं और कौन पर्दे के पीछे उसके हितों को फायदा पहुंचाते हैं।

कांग्रेस नेता ने झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू पर की जा रही आलोचनाओं को भी अनुचित और राजनीतिक निराशा का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि के. राजू का सार्वजनिक जीवन समाज के कमजोर वर्गों, किसानों, दलितों, आदिवासियों और पिछड़े समुदायों के अधिकारों के लिए समर्पित रहा है। उनके अनुसार, मनरेगा, सूचना का अधिकार (RTI), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून और भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास कानून जैसे महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी कानूनों को आकार देने में के. राजू की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। महिलाओं के सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के क्षेत्र में भी उनके योगदान का उल्लेख करते हुए दूबे ने कहा कि ऐसे व्यक्तित्व पर टिप्पणी करने से पहले उनके कार्यों का मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

आलोक दूबे ने कहा कि राज्यसभा चुनाव से कांग्रेस ने महत्वपूर्ण राजनीतिक सीख ली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी अब अपने संगठन को इतना मजबूत बनाने पर ध्यान देगी कि भविष्य में किसी सहयोगी दल पर निर्भर रहने की आवश्यकता न पड़े। उनका कहना था कि कांग्रेस आने वाले समय में अपनी राजनीतिक ताकत के दम पर राज्यसभा में अपने उम्मीदवार को जीताने की स्थिति हासिल करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ेगी।

उन्होंने अंत में कहा कि झारखंड की जनता गठबंधन के नाम पर राजनीति करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाले दलों की भूमिका को समझ चुकी है। कांग्रेस भविष्य में जनहित, लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की रक्षा के मुद्दों पर पहले से अधिक मजबूती के साथ संघर्ष जारी रखेगी।