राज्यसभा चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग को लेकर कांग्रेस पार्टी के भीतर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पार्टी ने अपने ही तीन विधायकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। इन विधायकों पर आरोप है कि उन्होंने मतदान के दौरान अनुपस्थित रहकर एनडीए उम्मीदवार को फायदा पहुंचाया।
मनिहारी से विधायक मनोहर प्रसाद सिंह ने बुधवार को प्रदेश मुख्यालय को अपना जवाब भेज दिया। उनके जवाब के बिना बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति आगे की कार्रवाई नहीं कर पा रही थी। इससे पहले वाल्मीकिनगर के सुरेंद्र कुशवाहा और फारबिसगंज के मनोज विश्वास अपना स्पष्टीकरण दे चुके थे।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, तीनों विधायकों के जवाब में किसी भी तरह का पछतावा नजर नहीं आया है। उल्टा, उन्होंने राज्यसभा चुनाव में हुई गड़बड़ी के लिए प्रदेश नेतृत्व को ही जिम्मेदार ठहराया है। इस रुख को देखते हुए यह साफ संकेत मिल रहा है कि ये विधायक पार्टी लाइन से हटकर काम कर रहे थे और अब भी अपने फैसले पर कायम हैं।
कांग्रेस नेतृत्व ने इन विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दो दिनों के भीतर जवाब मांगा था। जवाब मिलने के बाद अब अनुशासन समिति उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई, यहां तक कि पार्टी से निष्कासन, पर विचार कर रही है।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि इन विधायकों की मंशा पहले से ही पार्टी से अलग होने की थी। उनके जवाब से यह संकेत मिल रहा है कि वे कांग्रेस के साथ आगे नहीं रहना चाहते।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि कांग्रेस इन विधायकों पर क्या अंतिम फैसला लेती है और इसका राज्य की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।