बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज यानी 16 जनवरी से पश्चिम चंपारण के बेतिया से अपनी बहुप्रतीक्षित ‘समृद्धि यात्रा’ की शुरुआत की। बेतिया के बड़ा रमना मैदान में आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बड़ा और अहम ऐलान किया।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि अब सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। इसके लिए राज्य सरकार जल्द ही एक नई नीति लेकर आ रही है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी और आम लोगों को समय पर और बेहतर इलाज मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए मरीजों को भटकना न पड़े।
सभा को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने 2005 से पहले की सरकारों पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2005 से पहले बिहार की स्थिति बेहद खराब थी। लोग शाम के बाद घर से बाहर निकलने से डरते थे। समाज में विवाद आम बात थी और हिंदू-मुस्लिम झगड़े होते रहते थे। पढ़ाई-लिखाई की स्थिति कमजोर थी, इलाज की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी, सड़कें और बिजली की हालत भी बदहाल थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार आने के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किया गया और बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि अब क्या बिहार में हिंदू-मुस्लिम झगड़े होते हैं?
इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पश्चिम चंपारण जिले में 182 करोड़ रुपये की लागत से 161 विकास योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी किया। समृद्धि यात्रा के इस कार्यक्रम में दोनों उपमुख्यमंत्री भी मौजूद रहे।
वहीं, मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा के दौरान विरोध की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया। चंपारण में माले के युवा नेता फरहान राजा को गिरफ्तार किए जाने की खबर भी सामने आई है, जिसे लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है।
समृद्धि यात्रा के जरिए नीतीश कुमार एक बार फिर विकास और कानून-व्यवस्था के मुद्दे को केंद्र में रखकर जनता से सीधे संवाद करते नजर आ रहे हैं।