पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर आनंद मोहन ने उठाए सवाल, बोले— कानून निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए लागू

पूर्व सांसद आनंद मोहन ने सहरसा जिले के बख्तियारपुर में वीर योद्धा पृथ्वीराज चौहान की आश्वारोही प्रतिमा के शिलान्यास को ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण बताया है।

पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर आनंद मोहन ने उठाए सवाल, बोले— कानून निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए लागू
swaraj post

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
: Feb 08, 2026, 8:12:00 PM

पूर्व सांसद आनंद मोहन ने सहरसा जिले के बख्तियारपुर में वीर योद्धा पृथ्वीराज चौहान की आश्वारोही प्रतिमा के शिलान्यास को ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण बताया है। उन्होंने इस पहल के लिए इलाके के लोगों को साधुवाद देते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज को अपनी वीर परंपराओं से जोड़ने का काम करते हैं। आनंद मोहन के अनुसार, पृथ्वीराज चौहान जैसे पराक्रमी योद्धा की प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी और उन्हें अपने इतिहास पर गर्व करना सिखाएगी।

वहीं, पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी के सवाल पर पूर्व सांसद ने खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि यदि कोई मामला 31 साल पुराना है, तो उसमें गिरफ्तारी बहुत पहले हो जानी चाहिए थी। इतने लंबे समय बाद अचानक की गई कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आनंद मोहन ने साफ कहा कि कानून का पालन जरूरी है, लेकिन उसका इस्तेमाल बिना किसी दुर्भावना और भेदभाव के होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि कानून को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से लागू किया जाना लोकतंत्र की बुनियाद है। किसी भी तरह की राजनीतिक या व्यक्तिगत मंशा से की गई कार्रवाई न केवल न्याय व्यवस्था को कमजोर करती है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के भी खिलाफ है।

यूजीसी से जुड़े कानून और उसके विरोध पर बोलते हुए आनंद मोहन ने कहा कि इस विषय पर वे पहले भी कई बार अपनी बात रख चुके हैं। उनके अनुसार, किसी भी कानून में यह स्पष्ट संदेश नहीं जाना चाहिए कि केवल जाति के आधार पर ही यह तय कर दिया जाए कि कौन दोषी है और कौन पीड़ित।

उन्होंने पुराने प्रावधानों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले यूजीसी के 12वें कानून में यह व्यवस्था थी कि अगर किसी निर्दोष व्यक्ति को झूठे मामले में फंसाया जाता है, तो उसे भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलता था। साथ ही, आरोप गलत साबित होने पर झूठा मुकदमा दर्ज कराने वालों के खिलाफ दंड का प्रावधान भी था।

आनंद मोहन ने कहा कि ऐसे प्रावधान हटाने से विवाद और बढ़ेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें कानून से आपत्ति नहीं है, लेकिन दुरुपयोग रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा प्रावधान जरूरी हैं। यही वजह है कि यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।