ओवैसी के विधायक बोले- तेज आवाज में अजान मुनासिब नहीं..., हमारी परंपराएं-खानपान ठीक नहीं

बिहार के पूर्णिया जिले के अमौर विधानसभा क्षेत्र से विधायक अख्तरुल ईमान इन दिनों अजान को लेकर दिए गए अपने बयान की वजह से चर्चा में हैं

ओवैसी के विधायक बोले- तेज आवाज में अजान मुनासिब नहीं..., हमारी परंपराएं-खानपान ठीक नहीं
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
: Jan 31, 2026, 12:55:00 PM

बिहार के पूर्णिया जिले के अमौर विधानसभा क्षेत्र से विधायक अख्तरुल ईमान इन दिनों अजान को लेकर दिए गए अपने बयान की वजह से चर्चा में हैं. उन्होंने कहा है कि तेज आवाज में अजान देना ठीक नहीं है और इसमें संयम बरतना चाहिए.

अख्तरुल ईमान ने कहा कि अजान का मकसद नमाज के समय की जानकारी देना और लोगों को मस्जिद आने की दावत देना है. उन्होंने कहा कि आम तौर पर किसी मोहल्ले में मस्जिद से 400-500 मीटर के दायरे में रहने वाले लोग ही नमाज पढ़ने आते हैं, लेकिन कई जगहों पर अजान इतनी तेज आवाज में दी जाती है कि वह कई किलोमीटर दूर तक सुनाई देती है.

उन्होंने साफ कहा कि इस तरह तेज आवाज में अजान देना मुनासिब नहीं है. उनका कहना था कि इस्लाम में भी यह सिखाया गया है कि किसी को परेशानी पहुंचाना सही नहीं है. अगर मस्जिद में पहले से नमाज चल रही हो, उस वक्त भी बहुत तेज आवाज में अजान देना ठीक नहीं माना गया है.

अख्तरुल ईमान यहीं नहीं रुके। उन्होंने इस्लामी खान-पान और मजहबी परंपरा पर भी उठाए सवाल। AIMIM विधायक ने कहा, "यहां के लोगों की दावतों का भी ढंग अच्छा नहीं है। खाने-पीने की कोई टाइमिंग नहीं है।

दिन का बना हुआ खाना बाराती वाले रात के 12 बजे जाकर खा रहे हैं। बारात दिन को आई तो बाराती वाले मौलवी के पास जाकर खा रहे हैं। हमारे बॉडी का जो सिस्टम होता है, उसके मुताबिक ये तरीका सही नहीं है। खाने, सोने और जगने का टाइम होना चाहिए।"

उन्होंने कहा, "रात के 2 बजे मजहबी कार्यक्रम नहीं होना चाहिए। आप खुदा को रात के 2 बजे याद करें, इसमें दिक्कत नहीं, लेकिन जहां रात के 2 बजे औरतें इकट्ठे होते हैं, लोग इकट्ठे होते हैं, वहां इस तरह की मजलिस वाली कार्यक्रम पर रोक लगनी चाहिए।"

इस पूरे मुद्दे पर कई लोगों का कहना है कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ पड़ोसियों और समाज का सम्मान भी जरूरी है. भारत जैसे विविधता वाले देश में अलग-अलग धर्मों के लोग साथ रहते हैं, ऐसे में आपसी समझ और संयम बहुत अहम हो जाता है. अजान इस्लाम का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन उसकी आवाज को लेकर संतुलन बनाए रखना सामाजिक सौहार्द को मजबूत करता है. कई लोग मानते हैं कि अगर सभी समुदाय एक-दूसरे की भावनाओं का ध्यान रखें तो विवाद की कोई वजह ही नहीं बचेगी. अख्तरुल ईमान का बयान स्वयं में धर्म के अभ्यास और सामाजिक भावनाओं के बीच सामंजस्य की बात करता है

जानकारों की नजर में अख्तरुल ईमान का बयान अजान को रोकने या उस पर सवाल उठाने का नहीं है, बल्कि उसके तरीके और आवाज के स्तर पर संतुलन बनाने की अपील है. यह बयान धर्म और समाज के बीच तालमेल की बात करता है. यह मुद्दा हमें यह याद दिलाता है कि धार्मिक परंपराओं को निभाते हुए भी आपसी सम्मान और शांति बनाए रखना सबसे जरूरी है.