NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के मुद्दे पर झारखंड कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रही परीक्षा अनियमितताओं ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों का भरोसा तोड़ दिया है। उनके मुताबिक बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं प्रतिभाशाली युवाओं के भविष्य के साथ गंभीर अन्याय हैं।
राजेश ठाकुर ने आरोप लगाया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की गोपनीयता बनाए रखने में केंद्र सरकार पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी में छात्र कई वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं, वहीं अभिभावक भी अपनी आर्थिक क्षमता से बढ़कर बच्चों के सपनों को पूरा करने में जुटे रहते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं छात्रों की मेहनत और उम्मीदों पर बड़ा आघात हैं।
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। ठाकुर के अनुसार NEET से जुड़े पेपर लीक के मामले पहले भी 2016, 2021 और 2024 में सामने आ चुके हैं, जबकि अब 2026 की घटना ने चिंता को और गहरा कर दिया है।
कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार की ओर से सीबीआई जांच की घोषणा को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि केवल जांच एजेंसी के हवाले कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों में देशभर में दर्जनों प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जो परीक्षा प्रणाली की कमजोरियों को उजागर करती हैं।
राजेश ठाकुर ने कहा कि अब समय आ गया है कि जनता भावनात्मक और विभाजनकारी मुद्दों से हटकर युवाओं की शिक्षा और भविष्य को प्राथमिकता दे। उन्होंने लोगों से छात्रों के हित में आवाज उठाने की अपील की।
प्रधानमंत्री से मांग करते हुए ठाकुर ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष और तय समय सीमा के भीतर जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, छात्रों को हुए नुकसान की भरपाई और भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए पारदर्शी एवं मजबूत व्यवस्था लागू करने की भी मांग की।