लैंड फॉर जॉब केस: लालू परिवार को लगा बड़ा झटका, कोर्ट ने तय किए आरोप, अब ट्रायल होगा शुरू

जमीन के बदले नौकरी (लैंड फॉर जॉब) घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार को बड़ा झटका लगा है.

लैंड फॉर जॉब केस: लालू परिवार को लगा बड़ा झटका, कोर्ट ने तय किए आरोप, अब ट्रायल होगा शुरू
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
: Jan 09, 2026, 11:10:00 AM

जमीन के बदले नौकरी (लैंड फॉर जॉब) घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार को बड़ा झटका लगा है. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में लालू यादव समेत 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं. सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया. 

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने यह फैसला सुनाते हुए मामले में कुल 52 आरोपियों को बरी भी कर दिया। दिल्ली की राउस एवेन्यू कोर्ट ने इस बहुचर्चित मामले में लालू प्रसाद यादव सहित 40 से अधिक आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। जबकि दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) की चार्जशीट पर लालू, तेजस्वी यादव, राबड़ी देवी, तेज प्रताप, मीसा भारती, हेमा यादव समेत 40 लोगों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है।

सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने माना कि इस मामले में आगे सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं. अब अगली प्रक्रिया के तहत ट्रायल शुरू किया जाएगा और आरोपियों के खिलाफ सबूत पेश किए जाएंगे. 

सीबीआई का आरोप है कि लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले जमीन ली गई थी. यह जमीन लालू परिवार और उनके करीबी लोगों के नाम कराई गई. हालांकि, सभी आरोपियों ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है. सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया कि चार्जशीट में नामजद 103 आरोपियों में से पांच की मौत हो चुकी है.

सीबीआई ने इस मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे तेजस्वी यादव समेत कई लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. एजेंसी का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र (जबलपुर जोन) में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले जमीन ली गई. यह जमीन लालू परिवार या उनके करीबी लोगों के नाम कराई गई.