बिहार विधानसभा चुनाव में टिकारी सीट को लेकर वायरल बयान पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सफाई दी है. उन्होंने कहा, यह गलत और भ्रामक वीडियो है. उनकी बात को संदर्भ से अलग करके दिखाया गया है. मांझी के मुताबिक, उनका आशय सिर्फ इतना था कि मतगणना के समय रीकाउंटिंग मांगी जाती है और कई बार इससे नतीजे बदल जाते हैं.
केंद्रीय मंत्री मांझी ने कहा कि इस चुनाव में दो ऐसे मामले सामने आए, जहां एक जगह रीकाउंटिंग के बाद एनडीए का उम्मीदवार एक वोट से हार गया, जबकि दूसरी जगह 27 वोट से जीत गया. उनका कहना था कि अगर टिकारी सीट पर भी रीकाउंटिंग की मांग की जाती तो संभव है कि पार्टी वहां चुनाव जीत जाती.
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने शनिवार को पटना में मीडिया से बातचीत में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उनके एक वीडियो को गलत बताया। उन्होंने कहा, "इस (2025) के बिहार विधानसभा चुनाव में भी एक सीट पर रिकाउंटिंग हुई तो प्रत्याशी 27 वोट से चुनाव जीत गए। एक रिकाउंटिंग में जदयू के कैंडिडेट चुनाव हार गए। कहने का मतलब है कि रिकाउंटिंग मांगी जाती है। (मतगणना) के दौरान हमारा जैसे ही (वोट) डाउन हुआ, तो वो (प्रत्याशी) छोड़कर भाग गया। इसलिए उसको हमने कहा कि 2020 में रिकाउंटिंग हुआ तो तुम जीत गया था। रिकाउंटिंग मांगनी चाहिए थी। काहे भाग गया।"
दरअसल, मांझी का कुछ दिनों पहले गयाजी जिले में एक सभा का वीडियो वायरल हो रहा है। आरजेडी ने अपने आधिकारिक हैंडल से यह वीडियो शेयर कर आरोप लगाया कि मांझी खुले मंच से चुनाव नतीजों में हेराफेरी की बात कर रहे हैं।
आरजेडी के अनुसार, मांझी ने वीडियो में कहा कि बिहार में डेप्युटेशन पर आए त्रिपुरा कैडर के आईएएस अधिकारी अभिषेक कुमार सिंह की मदद से 2020 के चुनाव में टिकारी विधानसभा सीट पर 2700 वोट से हार रहे हम कैंडिडेट को जीत मिल गई थी। 2025 में मदद नहीं ली तो हम इस सीट पर चुनाव हार गई।