गर्ल्स हॉस्टल में छापा मारने पहुंच गए पप्पू यादव, बोले-सम्राट बाबू बच्चियां डरी हुईं हैं, बचा लीजिए

पटना के गांधी मैदान थाना क्षेत्र के पास स्थित एक पीजी गर्ल्स हॉस्टल में औरंगाबाद की रहने वाली एक NEET छात्रा की संदिग्ध मौत के बाद बिहार की सियासत गर्म हो गई है।

गर्ल्स हॉस्टल में छापा मारने पहुंच गए पप्पू यादव, बोले-सम्राट बाबू बच्चियां डरी हुईं हैं, बचा लीजिए
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
: Jan 20, 2026, 11:11:00 AM

पटना के गांधी मैदान थाना क्षेत्र के पास स्थित एक पीजी गर्ल्स हॉस्टल में औरंगाबाद की रहने वाली एक NEET छात्रा की संदिग्ध मौत के बाद बिहार की सियासत गर्म हो गई है। इस मामले को लेकर मंगलवार को पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव हॉस्टल पहुंचे और उन्होंने बिहार में संचालित गर्ल्स हॉस्टलों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।

हॉस्टल के बाहर मीडिया से बात करते हुए पप्पू यादव ने कहा कि पटना समेत पूरे बिहार में बड़ी संख्या में ऐसे गर्ल्स हॉस्टल चल रहे हैं, जो बिना लाइसेंस और बिना किसी सुरक्षा मानक के संचालित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि न तो इन हॉस्टलों की नियमित प्रशासनिक जांच होती है और न ही अग्निशमन व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षित प्रवेश-निकास, और वार्डन की अनिवार्य उपस्थिति जैसे बुनियादी नियमों का पालन किया जा रहा है।

पप्पू यादव ने कहा कि यह सिर्फ एक छात्रा की मौत का मामला नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि राज्य के सभी गर्ल्स हॉस्टलों के लाइसेंस की तत्काल जांच कराई जाए और जो हॉस्टल नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।

इस दौरान सांसद ने बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी से भावुक अपील करते हुए कहा, “हाथ जोड़कर कहता हूं सम्राट बाबू, बच्चियां डरी हुई हैं, इन्हें बचा लीजिए।” उन्होंने कहा कि छात्राओं की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पप्पू यादव ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा कि वे खुद इस मामले पर नजर बनाए रखेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दोषियों को बचाने की कोशिश हुई या प्रशासन ने लापरवाही बरती, तो वे सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेंगे।

सांसद ने दो टूक कहा कि चाहे दोषी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे हर हाल में बेनकाब किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और छात्राएं खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।