गिरिराज सिंह को कोर्ट से बड़ी राहत, केंद्रीय मंत्री बोले-ऐसी धाराएं लगाई गईं, जैसे हम आतंकवादी हों, जानें पूरा मामला
बेगूसराय सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को पुराने बयान मामले में बड़ी राहत मिली है। 'दो गज जमीन' बयान मामले में सोमवार को बेगूसराय व्यवहार न्यायालय में सुनवाई हुई। जहां एमपी-एमएलए कोर्ट ने गिरिराज सिंह की जमानत को बरकरार रखा है।
बेगूसराय सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को पुराने बयान मामले में बड़ी राहत मिली है। 'दो गज जमीन' बयान मामले में सोमवार को बेगूसराय व्यवहार न्यायालय में सुनवाई हुई। जहां एमपी-एमएलए कोर्ट ने गिरिराज सिंह की जमानत को बरकरार रखा है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत बरकरार रखी है, जबकि व्यक्तिगत उपस्थिति से स्थायी छूट संबंधी आवेदन पर आदेश सुरक्षित रखा गया है।
दरअसल केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए कथित 'दो गज जमीन' वाले बयान से जुड़े मामले में बड़ी राहत मिली है। एमपी-एमएलए कोर्ट के एसीजेएम प्रथम की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पूर्व से प्रभावी अग्रिम जमानत को बरकरार रखा है। सोमवार को एक दिवसीय बेगूसराय दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह कोर्ट पहुंचे और मामले की सुनवाई में भाग लिया।
अदालत में उनके अधिवक्ताओं ने पक्ष रखते हुए जमानत को यथावत रखने तथा व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट प्रदान करने की मांग की। सुनवाई के बाद न्यायालय ने पूर्व से प्रभावी जमानत को जारी रखने का आदेश दिया, जबकि धारा-205 के आवेदन पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
जमानत मिलने के बाद गिरिराज सिंह ने राहत जताते हुए इसे न्याय की जीत बताया। केंद्रीय मंत्री और बेगूसराय सांसद गिरिराज सिंह ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान उनके खिलाफ राजनीतिक दुर्भावना के तहत मामला दर्ज कराया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने राजनीतिक द्वेष के आधार पर आचार संहिता के तहत उन पर ऐसी धाराएं लगाई गईं, मानो वे कोई आतंकवादी हों। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और अदालत ने पहले भी उन्हें राहत दी थी तथा आज भी न्याय मिला है। इसके लिए उन्होंने न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त किया।
बता दें कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान जिला मुख्यालय स्थित जीडी कॉलेज परिसर में आयोजित एक सभा में दिए गए भाषण को लेकर गिरिराज सिंह के खिलाफ धार्मिक विद्वेष फैलाने सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। मामले की पैरवी कर रहे भारत सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल एवं वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार अमर ने बताया कि
इतने वर्षों के बाद भी अभियोजन पक्ष की ओर से कोई ठोस और प्रमाणिक साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जा सका है। कथित भाषण की न तो कोई प्रमाणिक वॉयस रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराई गई है और न ही मामले से संबंधित कोई सीजर लिस्ट रिकॉर्ड पर लाई गई है।
उन्होंने कहा कि गिरिराज सिंह केंद्रीय मंत्री हैं और अनेक प्रशासनिक एवं सरकारी दायित्वों का निर्वहन करते हैं। इसके बावजूद उन्होंने न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए स्वयं अदालत में उपस्थित होकर कानूनी प्रक्रिया में सहयोग किया। इसी कारण उनकी ओर से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-205 के तहत आवेदन दाखिल कर व्यक्तिगत उपस्थिति से स्थायी छूट देने का अनुरोध किया गया। सोमवार की सुनवाई मुख्य रूप से इसी आवेदन को लेकर थी, जिस पर अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया है। हालांकि दूसरी तरफ कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत की राहत बरकरार रखे जाने से गिरिराज सिंह को बड़ी कानूनी राहत मिली है।