बिहार की राजनीति के वरिष्ठ नेता और गोपालगंज के पूर्व सांसद पूर्णमासी राम का बुधवार को निधन हो गया। उन्होंने पटना स्थित रूबन हॉस्पिटल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही बिहार के राजनीतिक गलियारों, विशेषकर गोपालगंज और बगहा क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
पूर्णमासी राम बिहार के कद्दावर दलित नेताओं में शुमार थे। उन्होंने गोपालगंज सुरक्षित लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और सांसद के रूप में क्षेत्रीय समस्याओं को संसद में मजबूती से उठाया। इससे पूर्व वे पश्चिम चंपारण जिले के बगहा विधानसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार विधायक निर्वाचित हुए थे। बगहा में उनकी लोकप्रियता और मजबूत जनाधार का अंदाजा इसी से लगाया जाता है कि उन्होंने कई दशकों तक क्षेत्र की राजनीति में प्रभाव बनाए रखा।
वे बिहार सरकार में तीन बार मंत्री रहे। उन्होंने दो बार राज्य मंत्री तथा एक बार कैबिनेट मंत्री के रूप में जिम्मेदारियां निभाईं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने जनकल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया।
पूर्णमासी राम को सामाजिक न्याय के पैरोकार के रूप में भी याद किया जाता है। उन्होंने दलितों, वंचितों और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर संघर्ष किया। सरल स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व के कारण वे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों में सम्मानित थे।
उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। नेताओं ने इसे बिहार की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। अपने पीछे वे भरा-पूरा परिवार और हजारों समर्थक छोड़ गए हैं, जो अपने जनप्रिय नेता के निधन से मर्माहत हैं।