बिहार की राजनीति और प्रशासनिक जगत से आज की बड़ी खबर—नई सरकार में शिक्षा मंत्री बने सुनील कुमार ने मंगलवार को औपचारिक रूप से विभाग का कार्यभार संभाल लिया। शिक्षा विभाग के कार्यालय पहुंचने पर शिक्षा सचिव दिनेश कुमार ने गुलदस्ता देकर मंत्री का स्वागत किया। कार्यभार संभालने के बाद मीडिया से बातचीत में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि शिक्षा विभाग में लंबित तमाम नियुक्तियों को अब प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। खासकर शिक्षक भर्ती में तेजी लाई जाएगी, ताकि राज्य के विद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रभावित न हो।
इसी क्रम में शिक्षा विभाग ने एक नया आदेश जारी करते हुए विभिन्न श्रेणी के शिक्षकों की वरीयता (सीनियरिटी और प्रायोरिटी) तय कर दी है। विभाग के अनुसार, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में यदि प्रमंडलीय संवर्ग के सहायक शिक्षक तैनात हैं, तो उन्हें स्थानीय निकाय शिक्षक, विशिष्ट शिक्षक और विद्यालय अध्यापकों पर वरीयता मिलेगी। वहीं प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में जिला संवर्ग के सहायक शिक्षक को सबसे अधिक वरीय माना जाएगा। और यदि किसी स्कूल में प्रमंडलीय संवर्ग का सहायक शिक्षक उपलब्ध नहीं है, तो नियुक्ति नियमावली में निर्धारित मानकों के आधार पर ही वरीयता तय की जाएगी।
राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो सुनील कुमार भोरे विधानसभा क्षेत्र से जदयू के टिकट पर चुनाव जीते हैं। उन्होंने भाकपा माले के उम्मीदवार धनंजय को 16 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया और एक लाख से ज्यादा वोट हासिल किए। यह उनकी दूसरी पारी है जब वे नीतीश कुमार सरकार में शिक्षा मंत्री बने हैं। 2020 में पहली बार वे विधायक चुने गए थे।
राजनीति में आने से पहले सुनील कुमार एक प्रतिष्ठित IPS अधिकारी रहे हैं। 1987 बैच के अधिकारी सुनील कुमार बिहार में डीजी के पद से वर्ष 2020 में रिटायर हुए और रिटायरमेंट के तुरंत बाद ही पटना में जदयू नेता ललन सिंह की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी।