पटना: उच्चतम न्यायालय के केवल हिंदुओं, सिखों और बौद्धों को ही अनुसूचित जाति के रूप में मान्यता देने के फैसले का बिहार के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री सह एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष लखेन्द्र पासवान ने स्वागत किया है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि हिंदू, बौद्ध या सिख धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति (एससी) का सदस्य नहीं माना जा सकता है। शीर्ष कोर्ट ने कहा, "ईसाई या मुस्लिम धर्म अपनाने पर व्यक्ति का अनुसूचित जाति का दर्जा खत्म हो जाता है।"
उन्होंने कहा कि इस फैसले से ऐसे लोगों पर अंकुश लगेगा जो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय के लोग जो इस्लाम या ईसाई धर्म में परिवर्तित होने के बाद भी आरक्षण का लाभ उठाते रहते हैं।
उन्होंने कहा कि धर्मांतरित व्यक्तियों को आरक्षण का लाभ देना, बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर द्वारा परिकल्पित मूल लाभार्थियों के अधिकारों का हनन है।
उन्होंने कोर्ट के इस फैसले के लिए कोर्ट को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस फैसले से आरक्षण के हितों की रक्षा हुई है। इससे लालच देकर धर्मांतरण के विदेशी प्रायोजित प्रयासों पर भी अंकुश लगेगा और सही लाभार्थियों को लाभ होगा।