देशभर में चल रहे SIR अभियान को लेकर सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों पर अब विपक्ष खुलकर हमलावर है। भाकपा (माले) ने इस अभियान को लोकतंत्र और संविधान पर सीधा हमला करार देते हुए केंद्र और राज्य सरकारों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
भाकपा-माले ने ऐलान किया है कि 25 जनवरी 2026 को, गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर, देशभर में ‘संविधान संकल्प मताधिकार रक्षा दिवस’ मनाया जाएगा। इस दिन सभी जिला मुख्यालयों में विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनके जरिए मताधिकार की रक्षा और लोकतंत्र को कमजोर करने की कथित कोशिशों के खिलाफ आवाज बुलंद की जाएगी।
पार्टी के राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि SIR के नाम पर करोड़ों मतदाताओं के नाम मनमाने तरीके से मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा अभियान केंद्र और राज्य सरकारों के संरक्षण में चल रहा है, जिसका असली उद्देश्य गरीबों, वंचितों, अल्पसंख्यकों और प्रवासी मजदूरों को उनके मताधिकार से वंचित करना है।
कुणाल ने साफ शब्दों में कहा कि मताधिकार कोई सरकारी कृपा या औपचारिक उत्सव का विषय नहीं है, बल्कि यह संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिकों का मौलिक अधिकार है। अगर इस अधिकार को योजनाबद्ध तरीके से छीना गया, तो यह लोकतंत्र की जड़ों पर सीधा प्रहार होगा।
भाकपा-माले का कहना है कि SIR के जरिए मतदाता सूची में की जा रही कटौती लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पार्टी ने जनता से अपील की है कि वे आगे आकर संविधान, लोकतंत्र और अपने मताधिकार की रक्षा के लिए एकजुट हों।
अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और आने वाले दिनों में यह सियासी संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ता है।