बिहार पैक्स चुनाव में बड़ा बदलाव, अब कोई भी बन सकेगा सदस्य, खत्म होगा “फर्जी वोटर” खेल

बिहार में पैक्स चुनाव को लेकर इस बार जो बदलाव किया गया है, उसे सिर्फ एक नियम परिवर्तन नहीं बल्कि गांव की सियासत में बड़ा “गेम चेंजर” माना जा रहा है।

बिहार पैक्स चुनाव में बड़ा बदलाव, अब कोई भी बन सकेगा सदस्य, खत्म होगा “फर्जी वोटर” खेल
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
: Mar 25, 2026, 12:26:00 PM

बिहार में पैक्स चुनाव को लेकर इस बार जो बदलाव किया गया है, उसे सिर्फ एक नियम परिवर्तन नहीं बल्कि गांव की सियासत में बड़ा “गेम चेंजर” माना जा रहा है। अगर आप गांव से जुड़े हैं या खेती-किसानी से ताल्लुक रखते हैं, तो ये खबर आपके लिए बेहद अहम है। पहले सिस्टम क्या था, ज़रा उसे समझिए। पैक्स यानी प्राथमिक कृषि साख समिति—गांव के किसानों के लिए खाद, बीज, कर्ज और सरकारी योजनाओं तक पहुंच का बड़ा माध्यम। लेकिन सदस्य बनने की प्रक्रिया पूरी तरह अध्यक्ष या चुनाव लड़ने वाले लोगों के हाथ में रहती थी। वही तय करते थे कि कौन सदस्य बनेगा। नतीजा—अक्सर अपने समर्थकों को ही सदस्य बनाया जाता था और विरोधियों को बाहर रखा जाता था। यही वजह थी कि हर चुनाव से पहले “फर्जी सदस्य” और “मैनेज्ड वोटर लिस्ट” जैसे आरोप आम हो जाते थे। अब इस पुराने खेल पर ब्रेक लगाने की कोशिश हुई है। नई व्यवस्था के तहत अब कोई भी आम व्यक्ति खुद पैक्स का सदस्य बनने के लिए आवेदन कर सकता है।

न किसी सिफारिश की जरूरत, न किसी नेता के चक्कर लगाने की मजबूरी। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और हर आवेदन का रिकॉर्ड भी रहे। एक और बड़ा बदलाव—अब सदस्यों की संख्या पर कोई लिमिट नहीं होगी। पहले सीमित सदस्य बनाए जाते थे, जिससे कई योग्य लोग बाहर रह जाते थे। अब जो भी व्यक्ति पात्रता पूरी करेगा, वह सदस्य बन सकेगा। इससे गांव के ज्यादा लोग सीधे तौर पर चुनाव प्रक्रिया से जुड़ पाएंगे।

 महिलाओं और कमजोर वर्गों की भागीदारी बढ़ाने पर भी खास जोर दिया गया है। 13 सदस्यीय प्रबंधन समिति में 50 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी। साथ ही अतिपिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति के लिए भी सीटें तय की गई हैं। यानी अब पैक्स सिर्फ कुछ लोगों का क्लब नहीं, बल्कि सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करेगा।

सहकारिता विभाग ने नया आदेश जारी करते हुए सदस्य बनाने की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है। अब तक जहां पैक्स के अध्यक्ष या उम्मीदवारों के पास ही वोटर यानी सदस्य बनाने की जिम्मेदारी होती थी, वहीं अब कोई भी आम व्यक्ति खुद आवेदन करके पैक्स का सदस्य बन सकता है।

इस नए नियम का मुख्य उद्देश्य पैक्स चुनाव में पारदर्शिता बढ़ाना है। पहले यह आरोप लगता था कि अध्यक्ष या उम्मीदवार अपने फायदे के लिए मनमाने तरीके से वोटर बनाते थे। इससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठते थे। लेकिन अब नई व्यवस्था लागू होने के बाद इस तरह की गड़बड़ी की संभावना काफी कम हो जाएगी।

अगर कोई व्यक्ति पैक्स का सदस्य बनना चाहता है, तो उसे ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन की जांच की जाएगी और यदि उसमें कोई त्रुटि नहीं पाई जाती है तथा वह सभी नियमों के अनुरूप होता है, तो उसे सदस्यता दे दी जाएगी। इससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल हो जाएगी।

पैक्स का संचालन 13 सदस्यों की एक प्रबंधन समिति द्वारा किया जाएगा। इस समिति का चुनाव हर 5 साल में कराया जाएगा। नई व्यवस्था में आरक्षण का भी प्रावधान रखा गया है। प्रबंधन समिति में 50 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसके अलावा दो सीटें अतिपिछड़ा वर्ग और दो सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रहेंगी। इससे विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित होगी।