बिहार में राजस्व अधिकारियों की हड़ताल ने प्रशासनिक व्यवस्था को हिला कर रख दिया है। 700 से अधिक अधिकारियों ने पटना के राजघाट में बैठक कर सरकार के खिलाफ अपना विरोध और तेज कर दिया है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के अल्टीमेटम को नजरअंदाज करते हुए अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक बिहार राजस्व सेवा कैडर के साथ हुई नाइंसाफी दूर नहीं होती, तब तक उनकी अनिश्चितकालीन सामूहिक हड़ताल जारी रहेगी।
अधिकारियों के संघ का कहना है कि सरकारी दबाव के बावजूद कोई भी अधिकारी खाली अंचलों का प्रभार लेने को तैयार नहीं है। पटना में हुई इस अहम बैठक में कई कर्मचारी संगठनों ने भी समर्थन दिया, जिससे आंदोलन को और मजबूती मिली है।
इस हड़ताल का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। अंचल कार्यालयों में कामकाज पूरी तरह ठप हो चुका है। हर दिन करीब 10,000 परिमार्जन, 5,500 म्यूटेशन और 1,050 मापी के आवेदन लंबित होते जा रहे हैं। इससे लोगों को जमीन से जुड़े जरूरी कामों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है। विभाग के मुताबिक 563 अधिकारी काम पर लौट चुके हैं और कोई भी अंचल खाली नहीं है। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि जो अधिकारी अब तक ड्यूटी पर नहीं लौटे हैं, उन्हें चिह्नित कर बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी।
अब सवाल यह है कि क्या सरकार और अधिकारियों के बीच टकराव जल्द खत्म होगा, या फिर यह हड़ताल आने वाले दिनों में और बड़ा संकट खड़ा करेगी। फिलहाल, इस खींचतान में सबसे ज्यादा मुश्किलें आम जनता को ही झेलनी पड़ रही हैं।