अनंत सिंह ने कहा- निशांत में पिता वाला गुण, वही बनें CM, दिल्ली विदेश में थोड़े है 30 मिनट लगता है जाने में

मोकामा से जदयू विधायक और बाहुबली अनंत सिंह दुलारचंद हत्याकांड में जमानत पर बाहर आ गए हैं। मंगलवार को उन्होंने पटना से बड़हिया तक रोड शो किया। विरोधियों को मोकामा में अपनी ताकत भी दिखाई। अब वो पॉलिटिकली एक्टिव भी हैं।

अनंत सिंह ने कहा- निशांत में पिता वाला गुण, वही बनें CM, दिल्ली विदेश में थोड़े है 30 मिनट लगता है जाने में
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
: Mar 26, 2026, 12:59:00 PM

मोकामा की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। जदयू विधायक और बाहुबली नेता अनंत सिंह दुलारचंद हत्याकांड में जमानत पर बाहर आने के बाद पूरी तरह से एक्टिव नजर आ रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने पटना से बड़हिया तक भव्य रोड शो किया, जिसमें समर्थकों की भारी भीड़ देखने को मिली। इस रोड शो के जरिए उन्होंने न सिर्फ अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, बल्कि विरोधियों को मोकामा में अपनी ताकत का एहसास भी करा दिया।

रोड शो के बाद अनंत सिंह के बयान ने बिहार की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि नीतीश कुमार के बाद उनके बेटे निशांत कुमार ही मुख्यमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार हैं। अनंत सिंह ने निशांत को “सीएम मटेरियल” बताते हुए कहा कि उनमें नेतृत्व की सभी जरूरी खूबियां मौजूद हैं।

उन्होंने निशांत की सादगी और व्यक्तित्व की तुलना सीधे नीतीश कुमार से की। अनंत सिंह ने कहा कि इतने सालों तक मुख्यमंत्री रहने के बावजूद नीतीश कुमार के हाथ में सोने की एक अंगूठी तक नहीं है, जो उनकी ईमानदारी और सादगी का सबसे बड़ा उदाहरण है। यही सादगी और साफ-सुथरी छवि निशांत कुमार में भी साफ दिखाई देती है।

अनंत सिंह ने आगे कहा कि निशांत कुमार शिक्षित हैं और उनमें नेतृत्व करने की क्षमता भी है। उनका मानना है कि जनता अगर मौका दे, तो निशांत बिहार की राजनीति में एक मजबूत चेहरा बन सकते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर भविष्य में परिस्थिति बनी, तो निशांत मोकामा से चुनाव भी लड़ सकते हैं।

वहीं, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलों पर भी अनंत सिंह ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दिल्ली कोई विदेश नहीं है और बिहार से दिल्ली का सफर बेहद आसान है। उनके मुताबिक, चाहे नीतीश कुमार कहीं भी रहें, बिहार की राजनीति में उनका प्रभाव बना रहेगा।

अनंत सिंह ने यह भी साफ किया कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद पर नहीं रहते हैं, तो वे खुद भी चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि बिहार की जनता आज भी नीतीश कुमार के साथ है और उनके मार्गदर्शन में राज्य का विकास आगे भी तेज गति से जारी रहेगा।

इस बयान के बाद बिहार की सियासत में नई बहस शुरू हो गई है, जहां आने वाले समय में नेतृत्व को लेकर समीकरण बदलते नजर आ सकते हैं।