राज्यसभा की पांचवीं सीट पर टिकी सबकी नजर, NDA की 14-15 मार्च को अहम बैठक

बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सत्ता पक्ष एनडीए हो या विपक्षी महागठबंधन, दोनों ही खेमों में बैठकों का दौर लगातार जारी है। पांच सीटों पर होने वाले इस चुनाव में हर वोट की अहमियत बढ़ गई है

राज्यसभा की पांचवीं सीट पर टिकी सबकी नजर, NDA की 14-15 मार्च को अहम बैठक
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
: Mar 13, 2026, 9:24:00 AM

बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सत्ता पक्ष एनडीए हो या विपक्षी महागठबंधन, दोनों ही खेमों में बैठकों का दौर लगातार जारी है। पांच सीटों पर होने वाले इस चुनाव में हर वोट की अहमियत बढ़ गई है, ऐसे में दोनों गठबंधन अपने-अपने विधायकों और विधान पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे हैं।

एनडीए की तरफ से जीत की रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए 14 और 15 मार्च को अहम बैठकें बुलाई गई हैं। जानकारी के मुताबिक 14 मार्च को राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष और एनडीए प्रत्याशी उपेंद्र कुशवाहा के पटना स्थित आवास पर बैठक होगी। इस बैठक में गठबंधन के प्रमुख नेता चुनावी गणित और वोटिंग रणनीति पर चर्चा करेंगे। इसके अगले दिन यानी 15 मार्च को संसदीय कार्य मंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता विजय चौधरी के आवास पर अंतिम रणनीतिक बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में मतदान को लेकर अंतिम दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।

एनडीए ने अपने सभी विधायकों और विधान पार्षदों को साफ निर्देश दिया है कि वे पटना में ही मौजूद रहें और राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान होने तक कहीं बाहर न जाएं। माना जा रहा है कि गठबंधन किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग से बचना चाहता है और इसी वजह से लगातार बैठकें की जा रही हैं।

इससे पहले गुरुवार को डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के आवास पर भी अहम बैठक हुई थी। इस बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा, हम के वरिष्ठ नेता संजय सुमन, लोजपा (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी, रालोमो की विधायक स्नेहलता, विधान पार्षद रविंद्र सिंह और विधायक शालिनी मिश्रा समेत कई नेता मौजूद रहे। बैठक में सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया कि एनडीए के सभी पांचों उम्मीदवारों को वोट देकर उन्हें विजयी बनाया जाएगा।

वहीं राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर सियासी गणित सबसे ज्यादा दिलचस्प बना हुआ है। जीत के लिए 41 वोटों की जरूरत है। महागठबंधन के पास फिलहाल 35 विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है। ऐसे में उसे उम्मीद है कि एआईएमआईएम के पांच और बसपा के एक विधायक का समर्थन मिल जाए तो उसके उम्मीदवार की जीत की राह आसान हो सकती है। इसी गणित को साधने के लिए दोनों गठबंधन लगातार रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं।