YSS की 100 साल की साधना को मिला सम्मान! पद्म विभूषण चिरंजीवी ने दिया ‘उत्कृष्ट आध्यात्मिक सेवा’ से नवाज़ा

YSS की 100 साल की साधना को मिला सम्मान! पद्म विभूषण चिरंजीवी ने दिया ‘उत्कृष्ट आध्यात्मिक सेवा’ से नवाज़ा

YSS की 100 साल की साधना को मिला सम्मान! पद्म विभूषण चिरंजीवी ने दिया ‘उत्कृष्ट आध्यात्मिक सेवा’ से नवाज़ा
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Mar 19, 2026, 6:15:00 PM

हैदराबाद में आयोजित 99TV के 2026 उगादि पुरस्कार समारोह में योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया (वाईएसएस) को ‘उत्कृष्ट आध्यात्मिक सेवा’ के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत अभिनेता चिरंजीवी ने प्रदान किया। संस्था को यह पहचान तेलुगु समाज सहित वैश्विक स्तर पर क्रियायोग ध्यान के प्रचार-प्रसार में लंबे समय से निभाई जा रही उसकी भूमिका के लिए दी गई।

साल 1917 में स्थापित वाईएसएस आज भी आध्यात्मिक ज्ञान के क्षेत्र में एक प्रमुख संस्था के रूप में सक्रिय है। क्रियायोग की वैज्ञानिक पद्धतियों को जनसामान्य तक पहुंचाने के अपने प्रयासों के कारण यह संगठन देश-विदेश में निरंतर विस्तार करता रहा है और साधकों के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहा है।

इस अवसर का चिरंजीवी के लिए एक भावनात्मक पक्ष भी रहा। उनके पिता, स्वर्गीय कोनिडेला वेंकट राव, 1980 के दशक में वाईएसएस से जुड़े रहे और योगदा सत्संग पाठमाला के सक्रिय सदस्य थे। नेल्लोर स्थित उनका घर उस समय ध्यान साधकों के लिए एक केंद्र बन गया था। ऐसे में यह सम्मान उनके परिवार की आध्यात्मिक परंपरा से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

कार्यक्रम में वाईएसएस के उपाध्यक्ष स्वामी स्मरणानंद गिरि ने संस्था की विचारधारा और कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय ऋषियों द्वारा विकसित ध्यान की विधियां मन और श्वास के संबंध को समझने पर आधारित हैं, जो मन को स्थिर और नियंत्रित करने में सहायक होती हैं। उनके अनुसार, जब व्यक्ति ध्यान की सही प्रक्रिया को समझ लेता है, तो उसका अभ्यास स्वाभाविक रूप से जीवन का हिस्सा बन जाता है। क्रियायोग न केवल मानसिक और शारीरिक संतुलन को बेहतर करता है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

वाईएसएस द्वारा तेलुगु भाषा में उपलब्ध कराई गई चरणबद्ध गृह-अध्ययन पाठमालाओं ने लाखों लोगों को अपने दैनिक जीवन के साथ संतुलन बनाए रखते हुए ध्यान साधना अपनाने में मदद की है। यह पहल संस्था के उस मूल सिद्धांत को दर्शाती है, जिसमें समस्त मानवता को एक ही व्यापक चेतना का हिस्सा मानकर सेवा करने की भावना निहित है।

यह पुरस्कार स्वामी स्मरणानंद गिरि को प्रदान किया गया, जो आंध्र प्रदेश से संबंध रखते हैं और आईआईटी खड़गपुर से पीएचडी कर चुके हैं। उन्होंने 1985 में वैज्ञानिक और शैक्षणिक करियर को छोड़कर आध्यात्मिक मार्ग अपनाया। उनके योगदान को देखते हुए आईआईटी खड़गपुर ने भी वर्ष 2018 में उन्हें विशिष्ट पूर्व छात्र सम्मान से नवाजा था।

वाईएसएस का उद्देश्य ध्यान और क्रियायोग के माध्यम से मानव चेतना को उच्च स्तर तक विकसित करना, लोगों को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कष्टों से मुक्ति दिलाना तथा आध्यात्मिक जीवनशैली को घर-घर तक पहुंचाना है। संस्था विभिन्न आश्रमों, रिट्रीट कार्यक्रमों, शिक्षा और सेवा गतिविधियों के जरिए इस दिशा में काम कर रही है।

रांची, दक्षिणेश्वर, द्वाराहाट, नोएडा और चेन्नई सहित कई स्थानों पर सक्रिय वाईएसएस आज भी श्री श्री परमहंस योगानंद की शिक्षाओं को आगे बढ़ाते हुए आध्यात्मिक जागरूकता फैलाने में जुटी हुई है।