संसद के विस्तारित बजट सत्र के तहत तीन दिवसीय विशेष बैठक की शुरुआत गुरुवार से हुई, जिसमें महिला आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा केंद्र में रही। लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस मुद्दे को राजनीतिक दृष्टिकोण से ऊपर उठकर देखें और प्रस्तावित संविधान संशोधन का समर्थन करें।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण से जुड़े ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ केवल कानून नहीं, बल्कि देश के भविष्य को आकार देने वाले निर्णय हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक अवसर बार-बार नहीं आते और इन्हें राष्ट्र की धरोहर के रूप में संजोना चाहिए।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने यह भी संकेत दिया कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के मुद्दे पर पहले भी व्यापक चर्चा होती रही है, लेकिन इसे लंबे समय तक लागू नहीं किया जा सका। उन्होंने माना कि अगर यह कदम पहले उठाया गया होता, तो देश को इसका लाभ पहले ही मिल चुका होता।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए यह जरूरी है कि देश की आधी आबादी को नीति निर्माण में समान भागीदारी मिले। उन्होंने इसे केवल बुनियादी ढांचे या आर्थिक विकास तक सीमित न रखते हुए समावेशी विकास की दिशा में एक अहम कदम बताया।
उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान की शक्ति ने उन्हें समाज के पिछड़े वर्ग से आने के बावजूद देश की सेवा का अवसर दिया है। इसी संदर्भ में उन्होंने महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने को भी संविधान की भावना के अनुरूप बताया।
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि देश की महिलाएं हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन कर रही हैं, ऐसे में उन्हें निर्णय प्रक्रिया से दूर रखना उचित नहीं है। उन्होंने दोहराया कि यह किसी को लाभ पहुंचाने का प्रयास नहीं, बल्कि महिलाओं का अधिकार है, जिसे लंबे समय तक टाल दिया गया।
उन्होंने राजनीतिक दलों को चेताया कि इस विषय पर विरोध करने से उन्हें जनता, खासकर महिला मतदाताओं के बीच नुकसान उठाना पड़ सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई दल इस विधेयक का समर्थन करता है, तो उसका श्रेय लेने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है।
प्रधानमंत्री ने पंचायत स्तर पर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले वर्षों में स्थानीय निकायों में चुनी गई महिलाओं ने राजनीतिक समझ और नेतृत्व क्षमता विकसित की है। अब समय आ गया है कि उनके इस अनुभव को राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थान दिया जाए।
उन्होंने यह भी बताया कि देश के सैकड़ों शहरों में महिला प्रतिनिधि स्थानीय प्रशासन की अगुवाई कर रही हैं और विकास में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में संसद में उनकी भागीदारी से निर्णय प्रक्रिया और अधिक मजबूत होगी।
अपने भाषण के अंत में पीएम मोदी ने सभी दलों से आग्रह किया कि वे पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने में सहयोग दें। उन्होंने कहा कि यह केवल एक कानून नहीं, बल्कि देश की नारी शक्ति के सम्मान और सहभागिता को सुनिश्चित करने का ऐतिहासिक अवसर है।