बिहार-झारखंड की न्यायिक प्रक्रिया पर SC ने जताई नाराजगी, कहा-HC और ट्रायल कोर्ट कंप्लेन केस में नहीं दे सकते सरेंडर का आदेश

बिहार-झारखंड की न्यायिक प्रक्रिया पर SC ने जताई नाराजगी, कहा-HC और ट्रायल कोर्ट कंप्लेन केस में नहीं दे सकते सरेंडर का आदेश

बिहार-झारखंड की न्यायिक प्रक्रिया पर SC ने जताई नाराजगी, कहा-HC और ट्रायल कोर्ट कंप्लेन केस में नहीं दे सकते सरेंडर का आदेश
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Apr 24, 2026, 1:45:00 PM

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार और झारखंड में आपराधिक मामलों की सुनवाई के दौरान अपनाई जा रही कुछ प्रक्रियाओं पर गंभीर आपत्ति जताई है। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल समन जारी होने के आधार पर किसी आरोपी को गिरफ्तारी की आशंका नहीं होनी चाहिए। साथ ही, ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत के लिए अदालतों का रुख करना भी आवश्यक नहीं है।

यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें झारखंड हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने न सिर्फ अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, बल्कि आरोपी को ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण कर नियमित जमानत लेने का निर्देश भी दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस निर्देश को कानून की गलत समझ बताते हुए स्पष्ट किया कि इस प्रकार का आदेश देना उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

शीर्ष अदालत ने गिरफ्तारी से जुड़े नियमों को भी स्पष्ट करते हुए कहा कि जब कोई मजिस्ट्रेट किसी शिकायत पर संज्ञान लेते हुए समन जारी करता है, तो पुलिस को आरोपी को गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं होता। गिरफ्तारी की कार्रवाई केवल तब संभव है, जब अदालत समन के साथ गैर-जमानती वारंट भी जारी करे।

पीठ ने यह भी कहा कि यदि मजिस्ट्रेट दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 202 के तहत पुलिस को जांच करने का निर्देश देता है, तब भी जांच के दौरान पुलिस आरोपी को हिरासत में नहीं ले सकती। अदालत ने इस तरह की प्रक्रियात्मक चूक को गंभीर मानते हुए निर्देश दिया कि इस फैसले की प्रति बिहार और झारखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भेजी जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि संबंधित आदेश को दोनों राज्यों के मुख्य न्यायाधीशों के समक्ष रखा जाए, ताकि भविष्य में ऐसी त्रुटियों की पुनरावृत्ति न हो और अनावश्यक मुकदमों तथा अपीलों का बोझ कम किया जा सके। यह निर्णय ओम प्रकाश चव्हाणिका द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया।