‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से लोकतंत्र को नई दिशा, महिलाओं की भागीदारी होगी और सशक्त: नरेंद्र मोदी

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से लोकतंत्र को नई दिशा, महिलाओं की भागीदारी होगी और सशक्त: नरेंद्र मोदी

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से लोकतंत्र को नई दिशा, महिलाओं की भागीदारी होगी और सशक्त: नरेंद्र मोदी
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Apr 13, 2026, 4:48:00 PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को महिलाओं के राजनीतिक और सामाजिक सशक्तीकरण को देश के भविष्य के लिए निर्णायक बताते हुए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में शामिल किया। राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में उन्होंने कहा कि यह कानून केवल महिलाओं के अधिकारों का विस्तार नहीं है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र को अधिक प्रतिनिधिक और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि संसद के आगामी विशेष सत्र में इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर ठोस पहल की जाएगी। 16 अप्रैल से शुरू होने वाले इस सत्र के माध्यम से पंचायतों से लेकर संसद तक महिलाओं की भागीदारी को और व्यापक बनाने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा।

प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि महिलाओं को विधायिकाओं में आरक्षण देने का विचार नया नहीं है, बल्कि इस पर कई दशकों से चर्चा होती रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों और पीढ़ियों के प्रयासों का ही परिणाम है कि वर्ष 2023 में यह विधेयक सर्वसम्मति से संसद में पारित हो सका। उन्होंने उम्मीद जताई कि इसी सहयोगात्मक भावना के साथ इसे जमीन पर लागू करने की प्रक्रिया भी सफल होगी।

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों से लेकर आर्थिक निर्णय लेने वाली जिम्मेदारियों तक महिलाएं प्रभावी भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं का उदाहरण देते हुए बताया कि स्थानीय स्तर पर लाखों महिलाएं जनप्रतिनिधि के रूप में सक्रिय हैं और कई राज्यों में उनकी हिस्सेदारी आधी आबादी के बराबर पहुंच चुकी है।

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्हें एक ऐसी ग्राम पंचायत देखने का अवसर मिला, जहां पूरी पंचायत महिलाओं के हाथों में थी। वहां की महिला प्रधान का यह संकल्प कि गांव में कोई भी व्यक्ति गरीब न रहे, उनके लिए प्रेरणास्रोत बना।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि शासन और नीतिगत निर्णयों में महिलाओं की उपस्थिति से संवेदनशीलता और प्रभावशीलता दोनों बढ़ती हैं। इसी सोच के तहत केंद्र सरकार ने आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं।

उन्होंने बताया कि जनधन योजना के जरिए करोड़ों महिलाओं को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया है, जिससे उनकी आर्थिक स्वतंत्रता मजबूत हुई है। मुद्रा योजना के अंतर्गत भी बड़ी संख्या में महिलाओं को ऋण उपलब्ध कराया गया है, जिससे वे उद्यमिता के क्षेत्र में कदम रख रही हैं। इसके अलावा, स्टार्टअप क्षेत्र में भी महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और बड़ी संख्या में कंपनियों में महिला नेतृत्व दिखाई दे रहा है।

प्रधानमंत्री ने मातृत्व अवकाश की अवधि बढ़ाने, कौशल विकास कार्यक्रमों, ‘ड्रोन दीदी’ पहल और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान में महिलाओं की सक्रिय भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि ये प्रयास पारंपरिक सोच को बदलने में सहायक रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने महिलाओं के जीवन के हर चरण को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई हैं, जिनमें ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ और ‘मिशन इंद्रधनुष’ जैसी पहलें शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम और संविधान निर्माण में महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है और अब समय आ गया है कि उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में और अधिक अवसर दिए जाएं।

गौरतलब है कि सितंबर 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। अब सरकार इसके क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ रही है।

इस सम्मेलन में शिक्षा, विज्ञान, खेल, उद्यमिता और सामाजिक क्षेत्रों से जुड़ी अनेक प्रमुख महिलाओं ने भाग लिया। प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के अंत में महिलाओं को नए अवसरों के इस दौर की शुभकामनाएं देते हुए भरोसा दिलाया कि सरकार उनके सपनों को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है।