मालदा हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने पर बंगाल सरकार से जवाब तलब

मालदा हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने पर बंगाल सरकार से जवाब तलब

मालदा हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने पर बंगाल सरकार से जवाब तलब
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Apr 02, 2026, 3:17:00 PM

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में चुनाव आयोग की विशेष संशोधन प्रक्रिया (SIR) के दौरान तैनात न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई हिंसक घटना ने देश की सर्वोच्च अदालत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सात न्यायिक अधिकारियों को कथित तौर पर कई घंटों तक बंधक बनाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने इस घटना को न केवल कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया, बल्कि इसे न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश भी माना। अदालत ने विशेष रूप से जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि घटना की जानकारी होने के बावजूद जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक मौके पर क्यों नहीं पहुंचे।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाएं न्यायपालिका की स्वतंत्रता और सुरक्षा के लिए सीधी चुनौती हैं। पीठ ने राज्य सरकार के रवैये को ढीला बताते हुए कहा कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, जिससे स्थिति और बिगड़ी। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि प्रभावित अधिकारियों में तीन महिलाएं शामिल थीं, जिन्हें लंबे समय तक बिना पर्याप्त सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के रखा गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों (मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन अधिकारियों को अगली सुनवाई में वर्चुअली पेश होकर घटना पर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा, अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देशित किया है कि वह इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करे। कोर्ट ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती, संवेदनशील क्षेत्रों में सख्त निगरानी और न्यायिक अधिकारियों तथा उनके परिवारों की सुरक्षा का व्यापक आकलन करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।