देश के शीर्ष न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड और उत्तर प्रदेश सरकारों से स्पष्टीकरण तलब किया है। अदालत ने दोनों राज्यों से पूछा है कि उन्होंने ‘प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ’ मामले में निर्धारित प्रक्रिया के तहत संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को नामों का प्रस्ताव क्यों नहीं भेजा।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में राज्यों को अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा, जिसके बाद अगली सुनवाई की जाएगी। अदालत ने विभिन्न राज्यों से इस विषय से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।
इससे पहले 13 मार्च को हुई सुनवाई में अदालत ने डीजीपी नियुक्ति के संबंध में दिशा-निर्देशों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि जिन राज्यों ने इस विषय पर अपना अलग कानून बनाया है, उन्हें उसी के अनुसार कार्य करना होगा। हालांकि, जहां इस तरह का कोई विधिक प्रावधान मौजूद नहीं है, वहां सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में तय किए गए दिशानिर्देशों का पालन अनिवार्य होगा।
अदालत के समक्ष यह तथ्य रखा गया था कि कुछ राज्यों, जिनमें झारखंड और उत्तर प्रदेश शामिल हैं, ने डीजीपी नियुक्ति के लिए अलग नियम बनाए हैं। इसके संदर्भ में ‘प्रकाश सिंह’ मामले का उल्लेख महत्वपूर्ण है, जिसमें पुलिस सुधारों को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए थे।
इन निर्देशों के अनुसार, राज्य सरकारों को डीजीपी पद के लिए योग्य वरिष्ठ अधिकारियों के नाम यूपीएससी को भेजने होते हैं। इसके बाद आयोग तीन वरिष्ठतम अधिकारियों का एक पैनल तैयार करता है, जिसमें से राज्य सरकार एक अधिकारी का चयन कर उसे डीजीपी नियुक्त करती है। इस पद के लिए न्यूनतम दो वर्ष का कार्यकाल भी निर्धारित किया गया है।