अर्जेंट मामलों में एकल खिड़की व्यवस्था, अब केवल CJI के समक्ष ही होगी अत्यावश्यक मामलों की मेंशनिंग

अर्जेंट मामलों में एकल खिड़की व्यवस्था, अब केवल CJI के समक्ष ही होगी अत्यावश्यक मामलों की मेंशनिंग

अर्जेंट मामलों में एकल खिड़की व्यवस्था, अब केवल CJI के समक्ष ही होगी अत्यावश्यक मामलों की मेंशनिंग
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Apr 08, 2026, 3:04:00 PM

उच्चतम न्यायालय ने अत्यंत जरूरी मामलों की सुनवाई की प्रक्रिया में एक अहम बदलाव करते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब ऐसे मामलों, जिन्हें नियमित सूची में शामिल होने का इंतजार किए बिना तुरंत सुना जाना आवश्यक हो, उनका उल्लेख केवल भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के समक्ष ही किया जा सकेगा। यह व्यवस्था उस स्थिति में भी लागू रहेगी जब मुख्य न्यायाधीश किसी संविधान पीठ की अध्यक्षता में व्यस्त हों।

6 अप्रैल को जारी एक आधिकारिक परिपत्र में कहा गया है कि अत्यावश्यक मामलों की मेंशनिंग अब केवल कोर्ट नंबर-1, यानी मुख्य न्यायाधीश की अदालत में ही की जाएगी। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि वकीलों को ऐसे मामलों के लिए किसी अन्य पीठ के समक्ष जाने की अनुमति नहीं होगी, भले ही CJI किसी अन्य महत्वपूर्ण सुनवाई में व्यस्त क्यों न हों। यह कदम 29 नवंबर 2025 को जारी पूर्व निर्देशों से जुड़े भ्रम को दूर करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

न्यायालय का मानना है कि इस नई व्यवस्था से तत्काल सुनवाई की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और स्पष्ट होगी, साथ ही एक केंद्रीकृत प्रणाली विकसित होगी, जिससे अनावश्यक असमंजस की स्थिति खत्म होगी।

इस प्रशासनिक निर्णय के समानांतर, मुख्य न्यायाधीश ने हाल ही में न्यायिक ढांचे के सुदृढ़ीकरण पर भी जोर दिया था। तेलंगाना उच्च न्यायालय के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि देशभर में न्यायिक परिसरों का तेजी से विस्तार हो रहा है और राज्य सरकारें अब इस दिशा में अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से समझ रही हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करना संविधान की मूल भावना का हिस्सा है और हर राज्य में उच्च न्यायालय की स्थापना इसी सिद्धांत को साकार करने के लिए की गई है।

गौरतलब है कि पहले की व्यवस्था में, यदि मुख्य न्यायाधीश उपलब्ध नहीं होते थे, तो वकीलों को अत्यावश्यक मामलों के लिए वरिष्ठतम न्यायाधीश के समक्ष जाने की अनुमति थी। लेकिन नए निर्देशों के तहत इस विकल्प को समाप्त कर दिया गया है और अब पूरी प्रक्रिया को केवल मुख्य न्यायाधीश की अदालत तक सीमित कर दिया गया है।