क्या कोई सोच सकता है कि मजदूरी करते हुए कोई डॉक्टर बनने का सपना देख रहा है। लेकिन सरफराज के सपने बड़े थे। वह शिक्षा के महत्व को समझता था और खुद को और अपने परिवार को इस कठिन जीवन से बाहर निकालना चाहता था। डॉक्टर बनने का सपना देखना उनके लिए बहुत बड़ी बात थी क्योंकि उनके सामने गरीबी की ऊंची दीवार थी। लेकिन सरफराज ने उस दीवार को गिराने का फैसला किया। जब 2024 में नीट यूजी परीक्षा के नतीजे जारी हुए तो सरफराज की सक्सेस स्टोरी ने हर किसी को हैरान कर दिया और वह अब डॉक्टर बनने जा रहे हैं।
दरअसल यह कहानी है पश्चिम बंगाल के छोटे से गांव के निवासी सरफराज की। जो मेडिकल कॉलेज में एडमिशन से पहले ईंटें ढोते थे यानी मजदूर थे। सरफराज के परिवार की कुल कमाई महज 300 रुपये दिहाड़ी थी। सरफराज सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक ईंट भट्ठे पर काम करते थे। तपती धूप में हर दिन 400 ईंटें उठाते थे। फिर उसके बाद वह अपनी फटी-पुरानी किताबों से पढ़ाई करने में जुट जाते थे।
सरफराज के पास किसी बड़े कोचिंग सेंटर का साथ नहीं था। उनके पास बस एक पुराना, स्क्रीन से चटका हुआ स्मार्टफोन था। रात के अंधेरे में जब उनकी मां थकान से सो जाती थीं, तब सरफराज मोबाइल की धीमी रोशनी में यूट्यूब वीडियो देख-देखकर पढ़ाई करता।
सरफराज ने पहले एनडीए (NDA) की तैयारी की, पहले चरण में पास भी हुए, लेकिन एक एक्सीडेंट ने वो सपना तोड़ दिया। फिर उन्होंने नीट की तैयारी शुरू। एक बार डेंटल कॉलेज में सीट मिली, लेकिन हॉस्टल की फीस और रहने का खर्च न होने के कारण उन्हें सीट छोड़नी पड़ी। वह वापस ईंट भट्ठे पर लौट आए। गांव वाले हंसते थे, ताने मारते थे कि ‘मजदूर का बेटा डॉक्टर बनेगा?’ लेकिन सरफराज ने चुप्पी साधे रखी और बस अपना काम करते रहे।
फिर जब 2024 में नीट यूजी परीक्षा के नतीजे जारी हुए तो सरफराज ने सक्सेस स्टोरी से सबको हैरान कर दिया। सरफराज ने नीट यूजी में 720 में से 677 अंक हासिल किए थे। उन्हें कोलकाता के जाने-माने नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज (NRS) में एमबीबीएस की सीट मिली। कुछ सालों में सरफराज अपने खानदान के पहले डॉक्टर बनने का गौरव हासिल करेंगे। सरफराज की कहानी बताती है कि असली सफलता उन लोगों की कहानियों में छुपी होती है जो साधारण हालातों से निकलकर असाधारण मुकाम तक पहुंचते हैं। ये वो लोग होते हैं जो संघर्ष से नहीं घबराते, ठोकरें खाते हैं, लेकिन हर बार फिर से उठ खड़े होते हैं।