आप में सियासी भूचाल, राघव चड्ढा बीजेपी में शामिल, 7 सांसदों ने छोड़ा केजरीवाल का साथ

दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) में आज बड़ा धमाका हुआ है। पार्टी के चर्चित चेहरे और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने बगावत कर दी है।

आप में सियासी भूचाल, राघव चड्ढा बीजेपी में शामिल, 7 सांसदों ने छोड़ा केजरीवाल का साथ
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Amit Kumar
: Apr 24, 2026, 6:12:00 PM

दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) में आज बड़ा धमाका हुआ है। पार्टी के चर्चित चेहरे और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने बगावत कर दी है। राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और बीजेपी का दामन थाम लिया है। उनके साथ कई और सांसदों ने पार्टी को छोड़ दिया है।   

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा आप को छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए हैं। उनके साथ राज्यसभा सांसद संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भी एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी में शामिल होने का ऐलान किया। राघव चड्ढा ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि उनके साथ हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रमजीत साहनी और राजेंद्र गुप्ता जैसे बड़े नामों ने भी आम आदमी पार्टी छोड़ दी है।  

AAP के संस्थापक सदस्य और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने दावा किया कि राज्यसभा में पार्टी के 10 सांसद हैं और दो-तिहाई से ज्यादा हमारे साथ हैं। हमने इस संबंध में दस्तावेज राज्यसभा में जमा कर दिए हैं। सात सदस्यों के भाजपा में शामिल होने के बाद राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कुल तीन सदस्य ही रह जाएंगे। जिसमें संजय सिंह, नारायण दास गुप्ता और संत बलबीर सिंह शामिल हैं।

राघव चड्ढा ने कहा-मैं एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) का करियर छोड़कर भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना लेकर आया था, लेकिन आज यह पार्टी खुद भ्रष्टाचार के दलदल और समझौतावादी लोगों के चंगुल में फंस चुकी है। उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर अब वे घुटन महसूस कर रहे थे क्योंकि पार्टी का मौजूदा स्वरूप उसके शुरुआती सिद्धांतों से मेल नहीं खाता। 

बता दें कि राज्यसभा में आप पार्टी के डिप्टी लीडर रहे राघव चड्ढा के साथ-साथ 7 सांसदों ने पार्टी छोड़ दी है।  राघव के साथ संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस करते हुए इसका ऐलान किया।  इससे पहले 2 अप्रैल को राघव को पद से हटाए जाने के बाद ही ये कयास लगने लग गए थे कि वो कोई बड़ा कदम उठाने वाले हैं, क्योंकि उन्होंने पार्टी को खुली चुनौती देते हुए कहा था-मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना।