देश में तेजी से बढ़ रही ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के खिलाफ दवा विक्रेताओं ने बड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू किया है। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर बुधवार को राष्ट्रव्यापी बंद आयोजित किया गया है, जिसके चलते देशभर में लाखों निजी मेडिकल स्टोर बंद रहने की आशंका जताई जा रही है। इस हड़ताल का असर दवाओं की आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
केमिस्ट संगठनों का आरोप है कि कई ई-फार्मेसी कंपनियां दवा बिक्री से जुड़े नियमों का पूरी तरह पालन नहीं कर रही हैं। उनका कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर डॉक्टर के पर्चे की पर्याप्त जांच के बिना दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। साथ ही दवाओं के भंडारण और डिलीवरी प्रक्रिया में भी मानकों की अनदेखी किए जाने का दावा किया गया है।
दवा विक्रेताओं के मुताबिक, बिना पर्याप्त निगरानी के ऑनलाइन दवा कारोबार बढ़ने से नकली दवाओं की सप्लाई, प्रतिबंधित दवाओं का दुरुपयोग और चिकित्सकीय सलाह के बिना दवाओं की खरीद जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। खासकर नशीली और शेड्यूल-एच श्रेणी की दवाओं की ऑनलाइन उपलब्धता को लेकर फार्मासिस्टों ने गंभीर चिंता जताई है। उनका मानना है कि इससे सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ रहे हैं।
फार्मेसी संगठनों का कहना है कि पारंपरिक मेडिकल स्टोर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत तय कड़े नियमों का पालन करते हैं। इनमें प्रिस्क्रिप्शन की जांच, फार्मासिस्ट की निगरानी और दवाओं के सुरक्षित वितरण जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। इसके विपरीत, ऑनलाइन दवा प्लेटफॉर्म पर ऐसे सुरक्षा प्रावधान पर्याप्त रूप से लागू नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
बिहार केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन से जुड़े प्रतिनिधियों ने मांग की है कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्रकार की फार्मेसी के लिए एक समान नियामक व्यवस्था लागू की जाए। उनका कहना है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि कई जीवनरक्षक और संवेदनशील दवाओं को नियंत्रित तापमान में रखने की आवश्यकता होती है। ऑनलाइन डिलीवरी के दौरान यदि कोल्ड चेन व्यवस्था प्रभावित होती है, तो दवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता पर असर पड़ सकता है, जो मरीजों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
हालांकि हड़ताल के बीच प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के अंतर्गत संचालित जनऔषधि केंद्र खुले रहेंगे। पीएमबीजेपी से जुड़े संगठनों ने कहा है कि सरकारी अस्पतालों और बड़े चिकित्सा संस्थानों के पास स्थित केंद्रों पर दवाओं की उपलब्धता जारी रहेगी, ताकि मरीजों को आवश्यक दवाओं के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े।