राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पिछले वर्ष दिल्ली के लाल किला क्षेत्र में हुए भीषण कार बम विस्फोट मामले में बड़ा कदम उठाते हुए 10 आरोपियों के खिलाफ विस्तृत आरोपपत्र दाखिल किया है। करीब 7,500 पन्नों की इस चार्जशीट को पटियाला हाउस स्थित विशेष NIA अदालत में पेश किया गया। एजेंसी के अनुसार, यह मामला केवल एक आतंकी हमला नहीं बल्कि देशव्यापी कट्टरपंथी नेटवर्क और संगठित आतंकी साजिश से जुड़ा हुआ है।
10 नवंबर 2025 को हुए इस धमाके में 11 लोगों की जान गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। विस्फोट के कारण आसपास के इलाके में भारी नुकसान भी हुआ था। जांच एजेंसी का कहना है कि हमले की योजना लंबे समय से बनाई जा रही थी और इसमें अत्यधिक विस्फोटक क्षमता वाले उपकरणों का इस्तेमाल किया गया।
NIA के मुताबिक, आरोपियों का संबंध अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) से था, जिसे भारतीय उपमहाद्वीप में सक्रिय अल-कायदा की शाखा AQIS का सहयोगी संगठन माना जाता है। चार्जशीट में मुख्य आरोपी के रूप में पुलवामा निवासी डॉ. उमर उन नबी का नाम शामिल है, जिसकी मौत हमले के दौरान हो चुकी है। वह हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय में मेडिसिन विभाग में सहायक प्रोफेसर रह चुका था।
जांच में सामने आया कि 2022 में अफगानिस्तान पहुंचने की असफल कोशिश के बाद इस नेटवर्क के सदस्यों ने श्रीनगर में गुप्त बैठक की थी। इसी बैठक में संगठन को दोबारा सक्रिय करने की रणनीति बनाई गई। एजेंसी के अनुसार, समूह ने खुद को “AGuH Interim” नाम दिया और “ऑपरेशन हेवनली हिंद” शीर्षक से हिंसक अभियान चलाने की योजना बनाई, जिसका उद्देश्य भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर कट्टरपंथी शासन स्थापित करना था।
NIA ने दावा किया है कि मॉड्यूल के सदस्य जम्मू-कश्मीर, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में सक्रिय थे। जांच के दौरान पता चला कि समूह गुप्त तरीके से नए लोगों को जोड़ने, कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने और हथियारों की व्यवस्था करने में लगा हुआ था।
एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने ट्राइएसीटोन ट्राइपेरोक्साइड (TATP) जैसे अत्यधिक खतरनाक विस्फोटक तैयार करने के लिए अलग-अलग रसायनों की खरीद की और कई बार प्रयोग कर विस्फोटक मिश्रण को विकसित किया। जांच में यह भी सामने आया कि समूह ने ड्रोन आधारित और रॉकेट-सहायता प्राप्त IED तैयार करने तथा उनका परीक्षण करने की कोशिश की थी।
जांच एजेंसी ने बताया कि आरोपियों ने AK-47, क्रिंकोव राइफल और देसी पिस्तौल जैसे प्रतिबंधित हथियारों के साथ जिंदा कारतूस भी जुटाए थे। इसके अलावा MMO एनोड, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, स्विच और अन्य लैब उपकरण ऑनलाइन तथा ऑफलाइन माध्यम से खरीदे गए थे, जिनका उपयोग विस्फोटक और हथियार प्रणाली विकसित करने में किया जाना था।
फरीदाबाद और जम्मू-कश्मीर में छापेमारी के दौरान जांचकर्ताओं को विस्फोटक सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और प्रयोगशाला संबंधी उपकरण मिले। NIA का कहना है कि यह मॉड्यूल जम्मू-कश्मीर से बाहर भी अपना नेटवर्क फैलाने की दिशा में काम कर रहा था।
चार्जशीट में जिन अन्य आरोपियों के नाम शामिल हैं उनमें आमिर राशिद मीर, जसीर बिलाल वानी, डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. अदील अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, सोयब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार शामिल हैं।
NIA ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई है कि इस नेटवर्क में उच्च शिक्षित लोग और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े पेशेवर भी शामिल थे। एजेंसी का आरोप है कि इन लोगों ने अपनी तकनीकी और वैज्ञानिक जानकारी का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में किया।
जांच एजेंसी ने बताया कि आरोपपत्र को मजबूत बनाने के लिए वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों का व्यापक उपयोग किया गया। DNA परीक्षण, वॉयस सैंपल विश्लेषण और इलेक्ट्रॉनिक डेटा की जांच के जरिए कई अहम कड़ियां जोड़ी गईं। ब्लास्ट साइट से मिले जैविक नमूनों के आधार पर डॉ. उमर उन नबी की पहचान की गई।
NIA ने अब तक 588 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं, 395 से अधिक दस्तावेजी सबूत जुटाए हैं और 200 से ज्यादा भौतिक साक्ष्य जब्त किए हैं। एजेंसी का कहना है कि यह जांच देश में सक्रिय कट्टरपंथी नेटवर्क के बड़े ढांचे की ओर संकेत करती है।
चार्जशीट गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), भारतीय न्याय संहिता, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दायर की गई है। अब तक इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि NIA का कहना है कि कुछ संदिग्ध अभी भी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।