कोलकाता के साल्ट लेक स्थित विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन (VYBK) में विश्व प्रसिद्ध फुटबॉलर लियोनल मेसी के कार्यक्रम के दौरान हुई अफरातफरी और तोड़फोड़ ने पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासन में हलचल मचा दी है। इस पूरे मामले की जिम्मेदारी लेते हुए राज्य के खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए चार सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) के गठन का आदेश दिया है। इस टीम में सभी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी शामिल होंगे और इसकी रिपोर्ट के आधार पर लापरवाही व जवाबदेही तय की जाएगी।
सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर भी सख्त कदम उठाए हैं। खेल विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिन्हा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जबकि सॉल्ट लेक स्टेडियम के सीईओ डी.के. नंदन की सेवाएं तत्काल प्रभाव से वापस ले ली गई हैं।
दरअसल, अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर लियोनल मेसी तीन दिवसीय भारत दौरे पर थे। वे 13 दिसंबर की देर रात लगभग 2:30 बजे कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचे थे। अगले दिन सुबह 11 बजे उन्होंने कोलकाता में स्थापित अपने 70 फीट ऊंचे स्टैच्यू का वर्चुअल उद्घाटन किया। इसके बाद उनका सॉल्ट लेक स्टेडियम में करीब एक घंटे रुकने का कार्यक्रम था, लेकिन वे मात्र 22 मिनट में ही वहां से रवाना हो गए।
मेसी के जल्दी चले जाने से नाराज दर्शकों का गुस्सा स्टेडियम में फूट पड़ा। कई जगह कुर्सियां उखाड़ दी गईं और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं, जिससे कुछ समय के लिए भगदड़ जैसे हालात बन गए।
इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी। वहीं, एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) जावेद शमीम ने जानकारी दी कि कार्यक्रम के मुख्य आयोजक सताद्रू दत्ता को गिरफ्तार कर लिया गया है। आयोजकों की ओर से यह भी आश्वासन दिया गया है कि सभी दर्शकों को टिकट की राशि वापस की जाएगी। भारतीय फुटबॉल महासंघ ने स्पष्ट किया कि यह आयोजन उनके तत्वावधान में नहीं था।
इधर, राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने भी इस मामले को संज्ञान में लेते हुए राज्य सरकार से आयोजन की तैयारियों और प्रबंधन से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। यह कदम तब उठाया गया, जब बड़ी संख्या में फुटबॉल प्रशंसकों ने राजभवन और लोक भवन में शिकायतें दर्ज कराईं। फैंस का आरोप था कि टिकटों की कीमतें अत्यधिक रखी गई थीं, जिसके कारण आम दर्शक अपने पसंदीदा खिलाड़ी को देखने से वंचित रह गए। राज्यपाल को इस संबंध में कई फोन कॉल और ई-मेल भी प्राप्त हुए थे, जिसके बाद उन्होंने पूरे आयोजन की जांच रिपोर्ट मांगने का फैसला लिया।