महुआ मोइत्रा को पूर्व जज मार्कंडेय काटजू का न्योता, ‘इश्क़ करो पार्टी’ से जुड़ने का दिया प्रस्ताव
महुआ मोइत्रा को पूर्व जज मार्कंडेय काटजू का न्योता, ‘इश्क़ करो पार्टी’ से जुड़ने का दिया प्रस्ताव
नई राजनीतिक पहलों और वैचारिक अभियानों के बीच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने एक नई पहल की घोषणा की है। उन्होंने “इश्क़ करो पार्टी” नामक संगठन के गठन की जानकारी देते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा को इसमें शामिल होने का आमंत्रण दिया है। इस नए मंच का मूल संदेश प्रेम, सौहार्द और शांति को बढ़ावा देना बताया गया है।
रविवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर की गई एक पोस्ट में काटजू ने महुआ मोइत्रा को संबोधित करते हुए कहा कि वे अन्य राजनीतिक विकल्पों पर ध्यान देने के बजाय इस नए संगठन का हिस्सा बनें। उनके अनुसार, पार्टी का केंद्रीय विचार संघर्ष और टकराव के बजाय प्रेम और मानवीय संबंधों को प्राथमिकता देना है।
पूर्व न्यायाधीश ने अपनी पोस्ट में बताया कि वे इस संगठन के संरक्षक की भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, पार्टी के अध्यक्ष इरफान अली हैं, जो अमेरिका के न्यू जर्सी राज्य के प्रिंसटन शहर में निवास करते हैं। काटजू ने यह भी संकेत दिया कि संगठन डिजिटल स्तर पर अपनी पहचान स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है और जल्द ही इसकी वेबसाइट तथा सोशल मीडिया उपस्थिति विकसित की जाएगी।
यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब महुआ मोइत्रा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) पेपर लीक विवाद को लेकर सक्रिय रूप से अपनी राय रख रही हैं। हाल ही में उन्होंने उस अभियान का समर्थन किया था, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की जा रही है। यह अभियान सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दिपके के नेतृत्व में चलाया जा रहा है।
मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर दिपके की एक पोस्ट साझा की थी, जिसमें विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी दिखाई गई थी। उन्होंने आंदोलन के प्रति समर्थन जताते हुए इसे जारी रखने की अपील भी की थी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उनका यह रुख परीक्षा अनियमितताओं के मामले में जवाबदेही तय करने की मांग के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।
इसी संदर्भ में काटजू की प्रतिक्रिया सामने आई, जिसमें उन्होंने महुआ मोइत्रा को अपनी नवगठित “इश्क़ करो पार्टी” से जुड़ने का निमंत्रण दिया। उनकी यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है और इसे एक अनोखे राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।