केदारनाथ आपदा की बरसी पर नम हुईं आंखें, जलप्रलय की 13वीं बरसी पर याद किए आपदा पीड़ित
केदारनाथ आपदा की बरसी पर नम हुईं आंखें, जलप्रलय की 13वीं बरसी पर याद किए आपदा पीड़ित
उत्तराखंड के प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में बुधवार को वर्ष 2013 की भीषण आपदा में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। मंदिर परिसर में आयोजित इस विशेष सभा में श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों, तीर्थ पुरोहितों, प्रशासनिक अधिकारियों और सुरक्षा बलों के जवानों ने एकत्र होकर उन हजारों मृतकों और लापता व्यक्तियों को याद किया, जो जून 2013 की विनाशकारी आपदा का शिकार हुए थे।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं के प्रति सम्मान प्रकट किया और उनकी शांति के लिए प्रार्थना की। पूरे मंदिर परिसर में शोक, संवेदना और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला।
जून 2013 में उत्तराखंड ने अपने इतिहास की सबसे भयावह प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना किया था। लगातार कई दिनों तक हुई अत्यधिक बारिश और चोराबाड़ी झील के टूटने से मंदाकिनी घाटी में अचानक आई बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई थी। तेज बहाव के साथ आए मलबे, पत्थरों और पानी ने केदारनाथ क्षेत्र तथा आसपास के इलाकों को गंभीर नुकसान पहुंचाया था।
इस आपदा में रामबाड़ा सहित कई महत्वपूर्ण पड़ाव पूरी तरह नष्ट हो गए थे और यात्रा मार्ग के बड़े हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए थे। हजारों लोग इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गए, जिससे पूरे देश में शोक की लहर फैल गई थी।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस त्रासदी में 4,400 से अधिक लोग मृत या लापता घोषित किए गए थे, जबकि कई स्वतंत्र आकलनों में यह संख्या 6,000 के आसपास बताई गई। इस आपदा ने असंख्य परिवारों को गहरा आघात पहुंचाया।
विनाश के बीच एक तथ्य विशेष रूप से चर्चा का विषय बना रहा कि सदियों पुराना केदारनाथ मंदिर सुरक्षित बच गया। मंदिर के पीछे आकर रुकी एक विशाल चट्टान, जिसे आज ‘भीम शिला’ के नाम से जाना जाता है, ने मलबे और जलधारा की दिशा बदल दी, जिससे मंदिर को बड़े नुकसान से बचाने में मदद मिली।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह नौ बजे मंदिर परिसर में स्मृति सभा आयोजित की गई। केदारसभा के अध्यक्ष पंडित राजकुमार तिवारी के नेतृत्व में श्रद्धांजलि कार्यक्रम संपन्न हुआ। उपस्थित लोगों ने मौन रखकर मृतकों को श्रद्धासुमन अर्पित किए और आपदा में खोए जीवनों को याद किया।
सभा में तीर्थ पुरोहित समुदाय, स्थानीय व्यवसायी, हक-हकूकधारी, श्रद्धालु तथा विभिन्न सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में केदारसभा के पदाधिकारियों और क्षेत्र के कई प्रमुख सामाजिक व धार्मिक प्रतिनिधियों की भी उपस्थिति रही।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में पुलिस और राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) के कर्मियों ने भी हिस्सा लिया। जवानों ने उन साथियों और नागरिकों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने आपदा के दौरान अपने प्राण गंवाए थे। इस अवसर पर राहत और बचाव कार्यों से जुड़े कठिन अनुभवों को भी याद किया गया।
उल्लेखनीय है कि 2013 की आपदा के बाद भारतीय सेना और वायुसेना ने बड़े पैमाने पर राहत एवं निकासी अभियान चलाया था। इस अभियान के जरिए एक लाख से अधिक फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया था, जिसे देश के सबसे बड़े बचाव अभियानों में गिना जाता है। आपदा के बाद के वर्षों में केदारनाथ धाम ने पुनर्निर्माण और विकास की लंबी यात्रा तय की है। केंद्र और राज्य सरकारों की पहल पर यहां आधारभूत संरचनाओं को मजबूत किया गया, सुरक्षा व्यवस्थाओं में सुधार किया गया और आधुनिक आपदा प्रबंधन तंत्र विकसित किया गया।