जस्टिस सूर्यकांत बने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति भवन में ली CJI पद की शपथ

जस्टिस सूर्यकांत बने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति भवन में ली CJI पद की शपथ

जस्टिस सूर्यकांत बने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति भवन में ली CJI पद की शपथ
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Nov 24, 2025, 12:06:00 PM

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक प्रतिष्ठित समारोह में जस्टिस सूर्यकांत को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ दिलाई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
इस तरह जस्टिस सूर्यकांत आधिकारिक रूप से देश के 53वें CJI बन गए और आने वाले 14 महीनों तक इस सर्वोच्च संवैधानिक न्यायिक जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे।

सीनियरिटी परंपरा के तहत नियुक्ति

राष्ट्रपति द्वारा यह नियुक्ति पूर्व CJI डी.वाई. गवई की सिफारिश के आधार पर, संविधान के अनुच्छेद 124(2) में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए की गई। रविवार को 65 वर्ष की आयु पूरी होने पर जस्टिस गवई ने पद छोड़ा और सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठता पर आधारित नियुक्ति परंपरा को कायम रखते हुए अपने उत्तराधिकारी के रूप में जस्टिस सूर्यकांत का नाम भेजा।

हरियाणा से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर

10 फरवरी 1962 को हरियाणा के एक सामान्य परिवार में जन्में जस्टिस सूर्यकांत ने 1984 में हिसार से वकालत की शुरुआत की। बाद में वे चंडीगढ़ जाकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे, जहां उन्होंने संवैधानिक, सर्विस, सिविल और संस्थागत मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वे जुलाई 2000 में हरियाणा के सबसे युवा एडवोकेट जनरल बने और 2001 में सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किए गए।

2004 में उन्हें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का स्थायी जज बनाया गया। अक्टूबर 2018 से मई 2019 तक वे हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में उनकी पदोन्नति हुई। नवंबर 2024 से वे सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी के प्रमुख भी रहे हैं।

पदभार संभालने से पहले बताया अपना एजेंडा

शपथ ग्रहण से ठीक एक दिन पहले मीडिया से बातचीत में जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अदालतों में लंबित मामलों को कम करना उनका सर्वोच्च लक्ष्य होगा।
उन्होंने बताया कि वे सभी हाईकोर्ट के साथ मिलकर जिला और निचली अदालतों को प्रभावित करने वाली समस्याओं की पहचान पर जोर देंगे।

साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि आने वाले कुछ हफ्तों में 5, 7 और 9 जजों वाली संविधान पीठें गठित की जाएंगी ताकि वर्षों से रुके महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई तेजी से हो सके।

विवाद समाधान तंत्र और AI पर विचार

जस्टिस सूर्यकांत ने वैकल्पिक विवाद निपटान (ADR) को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया, विशेषकर सामुदायिक मध्यस्थता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर। उनका कहना था कि इससे राज्य सरकारों और केंद्र-राज्य विवादों में कमी लाई जा सकती है।

AI के उपयोग पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि तकनीक उपयोगी है, लेकिन चुनौतियां भी हैं। उनका स्पष्ट मत था कि प्रक्रियात्मक मामलों में AI सहायक हो सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय जजों को ही देना चाहिए क्योंकि लोग मानव निर्णय पर भरोसा करते हैं।

देश की अदालतों पर लंबित मामलों का बोझ

नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (NJDG) के 21 जुलाई के आंकड़ों के अनुसार, देश में 5.29 करोड़ से अधिक केस लंबित हैं।
इनमें से 4.65 करोड़ मामले जिला व निचली अदालतों में, 63.30 लाख हाईकोर्ट में और 86,742 सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।

जस्टिस सूर्यकांत ने भरोसा जताया कि नई रणनीतियों और मजबूत न्यायिक सहयोग से इस बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।