झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अब असम में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के चुनावी अभियान को नई दिशा देने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने जा रहे हैं। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उन्हें शुक्रवार को ही असम पहुंचना था, लेकिन प्रधानमंत्री के साथ एक अहम बैठक के कारण उनका दौरा टल गया। अब वह शनिवार को असम पहुंचकर दोपहर 2:30 बजे गोसाईगांव विधानसभा क्षेत्र में जनसभा को संबोधित करेंगे।
इस दौरे के साथ ही हेमंत सोरेन औपचारिक रूप से असम में पार्टी के चुनावी अभियान की कमान अपने हाथ में ले लेंगे। आगामी दिनों में उनके राज्य के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में लगातार सभाएं करने की योजना है, जिससे पार्टी अपने उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल तैयार करना चाहती है।
JMM के लिए यह चुनाव केवल सीटें बढ़ाने की कवायद नहीं, बल्कि खुद को राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित करने की एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व इस अभियान के जरिए अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करना चाहता है।
हेमंत सोरेन, जो पार्टी अध्यक्ष भी हैं, पूरे चुनावी अभियान की अगुवाई कर रहे हैं। JMM ने साफ संकेत दिए हैं कि वह असम में स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में है और इसके लिए संगठनात्मक स्तर पर पूरी ताकत झोंक दी गई है। पार्टी के महासचिव विनोद पांडेय लंबे समय से असम में डेरा डाले हुए हैं और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप रणनीति तैयार कर रहे हैं।
चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने अपने 20 प्रमुख प्रचारकों की सूची भी चुनाव आयोग को सौंप दी है। इस सूची में हेमंत सोरेन के अलावा सरफराज अहमद, सुप्रियो भट्टाचार्य, जोबा मांझी, दीपक बिरुआ, चमरा लिंडा, कल्पना मुर्मू सोरेन, अभिषेक प्रसाद और महुआ माजी जैसे नेता शामिल हैं। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और मंत्री पहले ही असम पहुंचकर जमीनी स्तर पर प्रचार को गति दे रहे हैं। JMM की चुनावी रणनीति सीमित लेकिन प्रभावशाली सीटों पर ध्यान केंद्रित करने की है।