जम्मू-कश्मीर से एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। आरक्षण नीति को लेकर उपजे तनाव के बीच प्रशासन ने पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती सहित कई प्रमुख नेताओं को एहतियातन नजरबंद कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद घाटी की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और श्रीनगर समेत कई इलाकों में असहज शांति का माहौल देखा जा रहा है।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, रविवार को छात्रों और विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा आरक्षण नीति के विरोध में प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए यह कदम उठाया गया। आशंका जताई जा रही थी कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। इसी के मद्देनज़र श्रीनगर सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई, सड़कों पर बैरिकेडिंग लगाई गई और आवाजाही पर आंशिक रोक लगा दी गई।
नजरबंद किए गए नेताओं में नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा रूहुल्लाह, PDP नेता वहीद-उर-रहमान और महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ये सभी नेता आज छात्रों के साथ मिलकर आरक्षण नीति के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले थे।
प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह एहतियाती है और इसका उद्देश्य किसी भी तरह की संभावित अशांति को रोकना तथा आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि हालात की लगातार समीक्षा की जा रही है और स्थिति सामान्य होने पर प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है।
वहीं, नेताओं को नजरबंद किए जाने को लेकर विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने कड़ा ऐतराज जताया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार और प्रशासन शांतिपूर्ण विरोध की आवाज को दबा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उनका कहना है कि आरक्षण नीति में हालिया बदलावों से युवाओं और कई सामाजिक वर्गों में नाराजगी है, जिसे अभिव्यक्त करने का अधिकार छीना जा रहा है।
कुल मिलाकर, आरक्षण नीति को लेकर बढ़ते विवाद के बीच प्रशासन की सख्ती ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।