आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय लापरवाही अब महंगी साबित हो सकती है। आयकर विभाग ने आकलन वर्ष 2026–27 के लिए दंड प्रावधानों को और कड़ा करते हुए एक नया पेनल्टी फ्रेमवर्क लागू किया है। इसका मकसद करदाताओं को अधिक सतर्क बनाना और टैक्स नियमों के पालन को सुनिश्चित करना है।
नए नियमों के तहत यदि कोई व्यक्ति अपनी आय को गलत तरीके से दर्शाता है (चाहे वह कम दिखाना हो या जानकारी में त्रुटि हो) तो उस पर देय टैक्स का 50 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, अगर यह साबित हो जाता है कि गलती जानबूझकर की गई है, जैसे आय छिपाना या भ्रामक विवरण देना, तो दंड की दर बढ़ाकर 200 प्रतिशत तक की जा सकती है।
रिटर्न दाखिल करने में देरी पर भी स्पष्ट प्रावधान तय किए गए हैं। समय सीमा के बाद ITR भरने पर अधिकतम ₹5000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, जिन करदाताओं की वार्षिक आय ₹5 लाख तक है, उनके लिए यह सीमा ₹1000 तक रखी गई है। इसके अलावा, टीडीएस या अन्य अनिवार्य विवरण समय पर जमा न करने पर ₹200 प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लग सकता है।
यदि कोई व्यक्ति समय पर सेल्फ-असेसमेंट टैक्स का भुगतान नहीं करता है, तो उस पर अलग से दंड लगाया जा सकता है। इस तरह के मामलों में जुर्माने की राशि निर्धारण अधिकारी तय करता है और यह बकाया कर के बराबर भी हो सकती है। गंभीर उल्लंघनों; जैसे अघोषित आय का पता चलने पर 10 से 60 प्रतिशत तक अतिरिक्त पेनल्टी लगाई जा सकती है, जो इस बात पर निर्भर करेगी कि जानकारी कैसे और कब सामने आई।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल आय छिपाने पर ही नहीं, बल्कि अन्य अनुपालन में चूक पर भी कार्रवाई होगी। इसमें खातों का सही रिकॉर्ड न रखना, अनिवार्य ऑडिट न कराना, आवश्यक दस्तावेज समय पर प्रस्तुत न करना या नकद लेन-देन से जुड़े नियमों का उल्लंघन शामिल है। कुछ परिस्थितियों में दंड की राशि विवादित रकम के बराबर तक पहुंच सकती है।
हालांकि, नियमों में राहत के प्रावधान भी मौजूद हैं। यदि करदाता यह सिद्ध कर देता है कि गलती उचित कारणों से हुई है, तो उसे दंड से छूट मिल सकती है। इसके अतिरिक्त, कुछ विशेष मामलों में विभाग द्वारा जुर्माना माफ करने का विकल्प भी रखा गया है।