दिल्ली में अफगान मंत्री की प्रेस वार्ता में महिला पत्रकारों की एंट्री पर रोक, भारत सरकार ने दी सफाई

दिल्ली में अफगान मंत्री की प्रेस वार्ता में महिला पत्रकारों की एंट्री पर रोक, भारत सरकार ने दी सफाई

दिल्ली में अफगान मंत्री की प्रेस वार्ता में महिला पत्रकारों की एंट्री पर रोक, भारत सरकार ने दी सफाई
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Oct 11, 2025, 4:15:00 PM

दिल्ली में अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को प्रवेश न देने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। घटना के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं, जिसके चलते भारत सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा है कि इस प्रेस वार्ता का आयोजन अफगान दूतावास ने स्वयं किया था और इसमें भारत सरकार या विदेश मंत्रालय की कोई भूमिका नहीं थी।

MEA ने जारी किया बयान

विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि मुत्तकी की प्रेस कॉन्फ्रेंस दिल्ली स्थित अफगान दूतावास परिसर में आयोजित की गई थी। यह पूरी तरह अफगान पक्ष का आयोजन था और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और मुत्तकी के बीच कोई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं हुई। मंत्रालय के मुताबिक, इस कार्यक्रम में मुत्तकी ने भारत-अफगान संबंधों, मानवीय सहयोग, व्यापारिक मार्गों और सुरक्षा सहयोग पर चर्चा की। प्रेस वार्ता में केवल चुनिंदा पुरुष पत्रकार और अफगान दूतावास के अधिकारी मौजूद थे।

महिला पत्रकारों को बाहर रखने पर बढ़ा विरोध

शुक्रवार को हुई इस घटना की जानकारी सामने आते ही पत्रकारों और राजनीतिक दलों ने नाराज़गी जताई। सोशल मीडिया पर इसे “भारत की महिला पत्रकारों का अपमान” बताते हुए आलोचना की जा रही है।

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “तालिबान प्रतिनिधि की प्रेस कॉन्फ्रेंस से महिला पत्रकारों को बाहर रखा गया — क्या यह भारत की महिलाओं का अपमान नहीं? प्रधानमंत्री को जवाब देना चाहिए कि इस पर सरकार की क्या राय है।”

वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “जब महिला पत्रकारों को प्रवेश से रोका गया, तब पुरुष पत्रकारों को वहां से खुद ही बाहर निकल जाना चाहिए था।”

अफगानिस्तान में महिलाओं पर प्रतिबंध जारी

गौरतलब है कि अगस्त 2021 में सत्ता में लौटने के बाद से तालिबान शासन ने महिलाओं और लड़कियों पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। उन्हें शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन से लगभग पूरी तरह बाहर कर दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे “महिला अधिकारों के सबसे बड़े वैश्विक संकटों में से एक” बताया है।

भारत सरकार ने दोहराया है कि महिला पत्रकारों को रोके जाने की यह घटना अफगान दूतावास के आयोजन से जुड़ी है और इसका भारत या उसके किसी सरकारी विभाग से कोई लेना-देना नहीं है।